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    कांग्रेस विधायक के सवाल पर सरकार का जवाब, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की योजना नहीं

    भोपालमध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राजधानी भोपाल में स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने को लेकर सदन में काफी चर्चा देखने को मिली। कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल विश्वविद्यालय का नाम बदलने से जुड़ा कोई भी आधिकारिक प्रस्ताव शासन के पास विचाराधीन नहीं है।

    उच्च शिक्षा विभाग से किया गया था सवाल

    कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा था कि क्या शासन ने ऐतिहासिक बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय लिया है। विधायक ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या सरकार महान क्रांतिकारी डॉ. बरकतउल्ला भोपाली को एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मानती है, और यदि वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, तो उनके नाम पर स्थापित इस संस्थान का नाम बदलना क्या उचित है।

    सरकार ने सदन में दिया स्पष्ट जवाब

    इस सवाल का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन को बताया कि "जी नहीं, फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। इस संबंध में तथ्यात्मक जानकारी जुटाई जा रही है।" मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित करने की प्रक्रिया के तहत उसे शासित करने वाले मूल अधिनियम में संशोधन विधेयक के माध्यम से ही बदलाव किया जा सकता है।

    विश्वविद्यालय के नाम बदलने को लेकर गरमाई सियासत

    गौरतलब है कि कुछ समय पहले बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के एक फैसले में यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी' करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि, शासन स्तर पर इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है।

    हाल ही में जहां विभिन्न हिंदू संगठनों और सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की मांग की जाती रही है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जनहित और विकास के वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार की राजनीति करती है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि तुष्टिकरण की नीति के चलते विपक्ष जनभावनाओं का सम्मान नहीं करना चाहता है।

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