वाशिंगटन। भारतीय प्रवासियों के प्रमुख नीति समूह 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) ने अमेरिका के नए वीजा नियमों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि एफ-1 और जे-1 वीजा पर चार साल की नई समय सीमा लागू होने से अंतरराष्ट्रीय छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य बीच में ही अधर में लटक सकते हैं। सितंबर के मध्य से प्रभावी होने जा रहे इस नियम को रोकने के लिए संगठन ने अमेरिकी जनप्रतिनिधियों और आव्रजन सेवा (USCIS) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
नए वीजा नियमों का छात्रों पर प्रभाव
इस विवादास्पद नीति के तहत पुरानी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था को हटाकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए रहने की अधिकतम अवधि केवल चार साल निश्चित कर दी गई है। इस सीमा में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और एसटीईएम ओपीटी की अवधि भी सम्मिलित है। साथ ही, पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को घटाकर अब महज 30 दिन कर दिया गया है। वीजा अवधि के विस्तार के लिए छात्रों को अब फॉर्म आई-539 के माध्यम से पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा, जो प्रक्रियागत जटिलताओं को और बढ़ाएगा।
अनुसंधान और नवाचार क्षमता को चुनौती
विशेषज्ञों का तर्क है कि स्नातक और पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में औसतन 5 से 6 साल का समय लगता है, ऐसे में चार साल की सीमा अव्यावहारिक है। पहले से ही लाखों लंबित आवेदनों के बोझ तले दबी अमेरिकी आव्रजन प्रणाली वीजा विस्तार के आवेदनों को समय पर निस्तारित करने में सक्षम नहीं दिखती। इस नीति से प्रयोगशालाओं में शोध कार्य बाधित होंगे और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता को खोकर प्रतिस्पर्धी देशों के लिए रास्ता साफ कर सकता है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करियर प्रभावित होगा, बल्कि अमेरिकी रिसर्च संस्थानों की उत्पादकता भी घटेगी।
आर्थिक नुकसान और सुधार की मांग
FIIDS ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की घटती संख्या का सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वर्ष 2025 के फॉल सेमेस्टर में दाखिलों में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान और हजारों नौकरियों का संकट खड़ा हुआ है। संगठन ने मांग की है कि 'ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस' सुरक्षा को पुन: बहाल किया जाए, ओपीटी को चार साल की गणना से बाहर रखा जाए और 60 दिनों का ग्रेस पीरियड वापस लाया जाए। यदि ये कदम नहीं उठाए गए, तो प्रतिभाओं का पलायन अमेरिका के शैक्षिक भविष्य के लिए बड़ा जोखिम साबित होगा।


