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    अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, तेहरान ने दी बड़े हमले की धमकी

    तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को बमबारी कर तबाह करने की चेतावनी के बाद, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को वर्ष 2001 में हुए 9/11 जैसे भयावह आतंकी हमले की सीधी धमकी दे डाली है। IRGC ने कहा है कि यदि अमेरिकी सेना ने अपने हमले तुरंत बंद नहीं किए, तो अमेरिका पर ऐसा घातक हमला किया जाएगा, जिससे देश में एक बार फिर राष्ट्रीय शोक की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

    डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी और अमेरिका की शर्त

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने समुद्री मार्ग में किसी भी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या रॉकेट दागे, तो अमेरिका ईरान के पुलों, पावर प्लांट्स और तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नेस्तनाबूद कर देगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित युद्धविराम की पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि ईरान जहाजों पर हमले रोके और होर्मुज में सामान्य जहाजरानी बहाल होने दे। गौरतलब है कि अमेरिका के अनुसार, ईरान बीते तीन महीनों में 30 से अधिक जहाजों को निशाना बना चुका है।

    12 दिनों से अमेरिका की बमबारी और परमाणु ठिकाने पर मंडराता खतरा

    अमेरिकी सेना बीते 12 दिनों से दक्षिणी ईरान में रणनीतिक ठिकानों और पुलों पर लगातार हवाई हमले कर रही है। अमेरिका ने ईरान के बेहद सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। इस पर पलटवार करते हुए तेहरान ने साफ किया है कि परमाणु ठिकाने पर हमला सीधे तौर पर पूरे पश्चिम एशिया में पूर्णकालिक युद्ध की घोषणा माना जाएगा, जिसके बाद ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों पर विनाशकारी हमले करने से नहीं हिचकिचाएगा।

    9/11 की याद और गहराता युद्ध संकट

    उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर 2001 (9/11) को अल-कायदा के आतंकवादियों ने अपहृत विमानों को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स से टकरा दिया था, जिसमें लगभग 3,000 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। ईरान द्वारा अमेरिका को 9/11 जैसा ही दर्द देने की सीधी धमकी और दोनों ओर से जारी प्रचंड सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) को एक बड़े महायुद्ध और तबाही की कगार पर ला खड़ा किया है।

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