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    पेपर लीक मामले में कांग्रेस आक्रामक, मोदी सरकार पर जवाबदेही से भागने का आरोप

    नई दिल्ली। देश में लगातार हो रही परीक्षा धांधलियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं की जिम्मेदारी लेने से लगातार बच रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार के शीर्ष मंत्री विपक्ष के जायज सवालों पर गोलमोल जवाब देकर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की राजनीति कर रहे हैं।

    नड्डा के बयान पर कांग्रेस का पलटवार

    कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाने के बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री की विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए। रमेश के अनुसार, सरकार परीक्षा प्रणाली की पूरी तरह से नाकाम हो चुकी व्यवस्था का बचाव करने में जुटी है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।

    एनटीए की कार्यप्रणाली और के. राधाकृष्णन समिति की अनदेखी

    कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के गठन की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के केंद्रीकरण के उद्देश्य से बनी यह एजेंसी अब पेपर लीक और अनियमितताओं का केंद्र बन चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के विवादों के बाद सुधारों का ढांग रचते हुए के. राधाकृष्णन समिति बनाई गई थी। इस समिति ने सुधार के लिए 101 अहम सुझाव दिए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। एजेंसी के शीर्ष पद को लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार पर चलाना सरकार की इस मुद्दे के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है।

    NEET-UG और UGC-NET परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप

    जयराम रमेश ने हालिया परीक्षाओं के नतीजों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नीट-यूजी (NEET-UG) का पेपर लीक होना और परीक्षा का रद्द होना कोई सामान्य चूक नहीं है। इसके अलावा यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पीड़ित छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, तो उनके जायज आक्रोश को सुनने के बजाय सरकार ने उन पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया। यह पूरी स्थिति शिक्षा मंत्रालय की लचर कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार की गलत नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है।

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