नई दिल्ली: संसद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। इसी गहमागहमी के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार की शाम अपने सरकारी आवास पर कांग्रेस पार्टी के दोनों सदनों के सभी सांसदों की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। संसद परिसर में उपजे इस भारी राजनीतिक तनाव के माहौल में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने रुख पर पूरी तरह अड़े हुए हैं।
संसद में नीट-यूजी विवाद पर क्यों छिड़ा है संग्राम?
विपक्ष की ओर से यह साफ मांग रखी गई है कि नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण पर संसद के भीतर चर्चा तभी मुमकिन हो सकेगी जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके अतिरिक्त, उच्च सदन राज्यसभा में नियम 267 के तहत अन्य सभी पूर्व निर्धारित विधायी कामकाज को रोककर तुरंत इस पर बहस कराने की शर्त रखी गई है। नियम 267 किसी भी राज्यसभा सांसद को सदन की नियमित सूची को स्थगित कर गंभीर मामलों पर चर्चा की मांग करने का विशेष अधिकार देता है। वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार का यह पक्ष है कि वह नीट के मसले और इससे जुड़े अन्य सभी विषयों पर सदन में चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है, बशर्ते विपक्ष इसके लिए किसी प्रकार की पूर्व शर्तें न थोपे।
किरण रिजिजू और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी नोकझोंक
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि सरकार नीट के मुद्दे पर खुली बहस चाहती है, लेकिन विपक्ष अनावश्यक शर्तें लगाकर जानबूझकर सदन की कार्यवाही में अड़ंगा डाल रहा है। उन्होंने कहा कि देश के सभी दलों ने नीट पर चर्चा की पुरजोर मांग की है और आज पूरे एनडीए गठबंधन ने भी फिर से यही मांग दोहराई है। कल जब मल्लिकार्जुन खरगे और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात हुई थी, तब यह उम्मीद बंधी थी कि आज सदन में सार्थक चर्चा हो जाएगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने आकर शर्तें रख दीं। हमने उनसे आग्रह किया था कि हम सब मिलकर यह तय कर सकते हैं कि चर्चा का स्वरूप और समयावधि क्या होगी, बशर्ते इस पर शर्तें न लादी जाएं। इससे साफ जाहिर होता है कि विपक्ष का इरादा चर्चा कराने का नहीं, बल्कि उसे रोकने का है। हम एक बार फिर आग्रह करते हैं कि बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के दोनों सदनों में नीट परीक्षा पर विस्तार से चर्चा की जाए।
इसके विपरीत, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए गए बयान पर तीखा पलटवार किया है। खरगे ने प्रधानमंत्री के उस वक्तव्य को सीधे तौर पर उकसाने वाला करार दिया और सरकार पर अपनी जवाबदेही से भागने का गंभीर आरोप लगाया। खरगे ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज प्रधानमंत्री की तरफ से जो बयान आया है, वह पूरी तरह से भड़काने वाला है। हमारी स्पष्ट मांग है कि शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, तभी हम सदन में किसी भी चर्चा के लिए तैयार होंगे।
इस पूरे प्रकरण से जुड़े पांच प्रमुख अपडेट
राहुल गांधी की आपात बैठक: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार की शाम अपने आवास पर कांग्रेस के दोनों सदनों के सांसदों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। विपक्ष की दो मुख्य शर्तें: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और राज्यसभा में नियम 267 के अंतर्गत इस गंभीर मामले पर तत्काल चर्चा कराना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा ऐलान: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पीएम मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि पेपर लीक जैसी आपराधिक वारदातों के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा और देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन: संसद भवन के मकर द्वार के बाहर एनडीए और इंडिया गठबंधन के सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर आमने-सामने आ गए, जहां दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित: दिनभर चले भारी हंगामे और तीखे विरोध-प्रदर्शन के चलते गुरुवार को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।
क्या मकर द्वार पर आमने-सामने आ गए थे सांसद?
संसद भवन के भीतर और उसके बाहरी परिसर में गुरुवार का पूरा दिन बेहद तनावपूर्ण माहौल में बीता। संसद के ऐतिहासिक मकर द्वार पर एनडीए और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसद कई अलग-अलग मुद्दों को लेकर आमने-सामने की स्थिति में आ गए। वहां दोनों ही राजनीतिक खेमों ने एक-दूसरे के विरोध में जोरदार नारेबाजी की। इस भारी-भरकम हंगामे और राजनीतिक गतिरोध के कारण आखिरकार दोनों सदनों की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए टालना पड़ गया।


