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    ईरान में फंसे तीन नेवी अफसरों की रिहाई की मांग, हाईकोर्ट 27 जुलाई को करेगा सुनवाई

    चंडीगढ़: ईरान में कथित ईंधन तस्करी के आरोपों के चलते बंदी बनाए गए व्यावसायिक जहाज 'एमटी ग्लोबल चेरीलिन' के तीन भारतीय अधिकारियों की स्वदेश वापसी और तत्काल रिहाई से जुड़ी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में 27 जुलाई को सुनवाई होने जा रही है। इस कानूनी याचिका में केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) और महानिदेशालय शिपिंग (DG Shipping) को हस्तक्षेप करने तथा बंदियों की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

    ईरान में फंसे तीन वरिष्ठ भारतीय नौसैनिकों का मामला

    यह पूरा मामला मालवाहक जहाज के कैप्टन अशोक कुमार, चीफ ऑफिसर विकास मलिक और सेकेंड ऑफिसर अरविंद कुमार बिंद से जुड़ा हुआ है। ये तीनों भारतीय अधिकारी विदेशी जलसीमा में पोत के साथ बंदी बनाए गए थे और फिलहाल ईरान में न्यायिक प्रक्रिया व सजा का सामना कर रहे हैं। उनके परिवारों ने न्यायिक शरण लेते हुए भारत सरकार से उनके मानवीय अधिकारों की रक्षा और कूटनीतिक सहायता की गुहार लगाई है।

    विदेश मंत्रालय और डीजी शिपिंग से हस्तक्षेप की मांग

    उच्च न्यायालय में दायर इस याचिका में विदेश मंत्रालय और डीजी शिपिंग को प्रतिवादी बनाते हुए उनके तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपील की है कि संबंधित मंत्रालयों को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने और मामले में त्वरित कानूनी तथा कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए एक स्पष्ट और निश्चित समय-सीमा तय करने के कड़े निर्देश दिए जाएं।

    उच्च न्यायालय में 27 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण सुनवाई

    पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस दिन अदालत केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों से इस दिशा में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मांग सकती है। याचिकाकर्ताओं को उम्मीद है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अधिकारियों की रिहाई प्रक्रिया में तेजी आएगी और उन्हें जल्द राहत मिलेगी।

    परिजनों की आस और कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी उम्मीदें

    ईरान की हिरासत में मौजूद तीनों भारतीय नौसैनिकों के परिजन लंबे समय से उनकी सकुशल वापसी का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले में हाईकोर्ट का रुख और विदेश मंत्रालय की संभावित कूटनीतिक पहल ही अब पीड़ितों के लिए उम्मीद की मुख्य किरण बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फंसे इन भारतीय नागरिकों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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