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    नौगांवा में चातुर्मास का शुभारंभ, गुरु पूर्णिमा पर मंगल कलश स्थापना

    ज्ञानभूषण महाराज के सानिध्य में 34वें चातुर्मास की शुरुआत, श्रद्धालुओं ने किया गुरु वंदन

    नौगांवा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नौगांवा स्थित बस स्टैंड के निकट श्री दिगंबर जैन मंदिर में जैनाचार्य ज्ञानभूषण महाराज एवं ससंघ संतों के सानिध्य में मंगल कलश स्थापना के साथ 34वें चातुर्मास का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के वातावरण में हुआ। गुरु वंदना एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के बीच चार माह की साधना, संयम और आध्यात्मिक आराधना के इस महापर्व का विधिवत शुभारंभ किया गया।

     

    मंगल कलश स्थापना समारोह में नौगांवा, रामगढ़, अलवर, लक्ष्मणगढ़, फिरोजपुर झिरका सहित आसपास के अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया। जैन समाज नौगांवा की ओर से सभी आगंतुक अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया।

    आयोजकों ने बताया कि आगामी चार माह तक चलने वाले चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान, तप, पूजन तथा विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को नियमित रूप से आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं धर्मचर्चा का लाभ मिलेगा।

    उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में चातुर्मास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वर्षा ऋतु के दौरान आचार्य एवं साधु-संत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्मोपदेश देते हैं। इस अवधि में श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, साधना, संयम एवं सत्संग का विशेष अवसर प्राप्त होता है। चातुर्मास के माध्यम से चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों की स्थापना तथा आत्मकल्याण का संदेश समाज तक पहुंचाया जाता है।

    जैनाचार्य ज्ञानभूषण महाराज अपने प्रवचनों में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, आत्मसंयम, करुणा एवं सदाचार जैसे जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालेंगे। उनके सानिध्य में समाज के सभी वर्गों को आध्यात्मिक उन्नति, नैतिक जागरण तथा भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। विशेष रूप से युवाओं को संस्कारवान एवं अनुशासित जीवन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

     

    आयोजकों ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सामूहिक स्वाध्याय, जप, ध्यान, संस्कार शिविर, धार्मिक प्रतियोगिताएं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। इन आयोजनों से समाज में सेवा, सद्भाव, सहयोग और धार्मिक एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

    समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अपील की है कि गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हुए इस चातुर्मास काल में अधिकाधिक संख्या में धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित करें तथा आध्यात्मिक उन्नति की इस पावन यात्रा का हिस्सा बनें।

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