चंडीगढ़। पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (MMSY) ने नवांशहर में एक बार फिर अपनी सार्थकता साबित करते हुए समय से लगभग तीन महीने पहले और केवल 27वें सप्ताह में जन्मी एक बेहद नाजुक बच्ची की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है। जन्म के समय मात्र 700 ग्राम वजन वाली इस नवजात को एक सूचीबद्ध निजी अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में लगातार 50 दिनों तक विशेष चिकित्सा देखरेख में रखा गया। इस पूरी जीवनरक्षक प्रक्रिया का करीब तीन लाख रुपये का पूरा खर्च योजना के तहत पूरी तरह से कैशलेस उपलब्ध कराया गया, जिससे गरीब परिवार को भारी आर्थिक संकट से राहत मिली।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का बयान, कहा- किसी भी परिवार को इलाज के लिए पैसे की नहीं होनी चाहिए चिंता
राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य के हर जरूरतमंद परिवार को वित्तीय तंगी की परवाह किए बिना उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी परिवार को अपनों की जान बचाने और इलाज के लिए पैसे जुटाने के बीच कभी मजबूर नहीं होना चाहिए। हर मां सुरक्षित प्रसव की अधिकारी है और हर नवजात को इस दुनिया में जीने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, जिसके लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
योजना के तहत हजारों नवजातों और माताओं को मिला करोड़ों का लाभ, गंभीर मामलों में भी मिली जीवनदान जैसी राहत
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए चलाए जा रहे विभिन्न पैकेजों का लाभ बड़े पैमाने पर मिल रहा है। पिछले करीब सात महीनों में 'स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज' के तहत 1,869 नवजातों और 'इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज' के तहत 1,719 नवजातों के उपचार पर करोड़ों रुपये के दावे स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा एडवांस्ड और क्रिटिकल केयर पैकेजों के माध्यम से भी गंभीर जटिलताओं के साथ जन्मे सैंकड़ों शिशुओं को नया जीवन मिला है, साथ ही उच्च जोखिम वाली दर्जनों माताओं को भी इस कैशलेस योजना का सीधा लाभ पहुंचा है।
अस्पताल के 50 दिनों के कड़े संघर्ष के बाद स्वस्थ हुई बच्ची, माता-पिता ने पंजाब सरकार का जताया आभार
नवांशहर के शिव शंकर मोहल्ला निवासी बच्ची के पिता सूरज ने बताया कि 9 जून, 2026 को जन्मी उनकी बेटी के फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने के कारण उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी थी। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखकर 50 दिनों तक कड़ी निगरानी में इलाज किया। डॉक्टर हरतेश सिंह पाहवा और उनकी मेडिकल टीम की बेहतरीन देखरेख और सरकारी योजना के समर्थन से आज उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आई है। पिता ने भावुक होकर कहा कि उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन मुख्यमंत्री सेहत योजना और पंजाब सरकार के सहयोग ने उनके परिवार की दुनिया उजड़ने से बचा ली।


