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    राज्योत्सव में कला और संगीत का संगम, स्वास्ति की प्रस्तुति समेत 11 कार्यक्रम होंगे आयोजित

    रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के दूसरे दिन नवा रायपुर अटल नगर में कला, संस्कृति, संगीत और लोक परंपराओं का एक अत्यंत भव्य एवं मनमोहक संगम देखने को मिलेगा। तीन दिवसीय इस गरिमामयी आयोजन के तहत आज भारतीय शास्त्रीय कला और सुगम संगीत की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। राज्योत्सव के मुख्य मंच पर सुप्रसिद्ध नाट्य ‘मैं अयोध्या हूं’ का मंचन होगा, वहीं देश की चर्चित पार्श्व गायिका स्वास्ति मेहुल अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लेंगी। इसके अतिरिक्त, शिल्पग्राम परिसर में प्रदेश के कोने-कोने से पधारे कलाकार अपनी अनूठी लोककलाओं और सांस्कृतिक प्रतिभा का जीवंत प्रदर्शन करेंगे। इस विशेष समारोह में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

    मुख्य मंच पर ‘मैं अयोध्या हूं’ नाट्य का भव्य मंचन

    राज्योत्सव के दूसरे दिन मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शाम 6 बजे से आरंभ होगा। कार्यक्रम के प्रथम चरण में शाम 6 से 7 बजे के मध्य विशेष नाट्य प्रस्तुति ‘मैं अयोध्या हूं’ का मंचन किया जाएगा। इस कलात्मक प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की प्राचीन ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक गौरवशाली विरासत को बहुत ही सुंदर ढंग से जीवंत किया जाएगा। भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपराओं की झलक पेश करने वाला यह नाट्य मंचन दर्शकों के लिए एक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा, जो भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को गहराई से अभिव्यक्त करेगा।

    सुनील सोनी और स्वास्ति मेहुल के सुरों से सजेगी शाम

    सांस्कृतिक संध्या को और अधिक संगीतमयी बनाने के लिए शाम 7 से 8 बजे तक छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी अपनी मधुर प्रस्तुति देंगे। उनके गीतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संगीत की सोंधी खुशबू और लोक पहचान का अनूठा रंग मंच पर बिखरेगा। इसके पश्चात रात्रि 8 बजे से प्रसिद्ध पार्श्व गायिका स्वास्ति मेहुल अपनी जादुई आवाज से राज्योत्सव की शाम को सुरमयी और यादगार बनाएंगी। लोक संस्कृति, नाट्य कला और आधुनिक संगीत का यह त्रिवेणी संगम दर्शकों को एक अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगा।

    शिल्पग्राम में ग्यारह सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोकनृत्यों की धूम

    मुख्य मंच के साथ-साथ शिल्पग्राम परिसर में भी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति और भारतीय शास्त्रीय कलाओं की अद्भुत छटा देखने को मिलेगी। शिल्पग्राम के मंच पर दोपहर 3 बजे से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का श्रीगणेश होगा, जिसके तहत कुल 11 आकर्षक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इन प्रस्तुतियों में लोकसंगीत, विश्वप्रसिद्ध पंडवानी, पारंपरिक सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, सूफी संगीत, गजल और लोकमंच जैसी विविध विधाओं को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    इस दौरान प्रसन्ना अवस्थी द्वारा लोकसंगीत व नृत्य, सुष्मिता दास द्वारा ओडिसी नृत्य, दुर्ग की समप्रिया पूजा निषाद द्वारा ओजस्वी पंडवानी गायन, बिलासपुर के अंकित निर्मलकर द्वारा सूफी एवं गजल गायन की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। वहीं गरियाबंद की मिलवंतीन बाई सुआ नृत्य के माध्यम से लोकजीवन की छटा बिखेरेंगी, जबकि रायपुर की मेघा बोस ताम्रकार पारंपरिक लोकसंगीत से रूबरू कराएंगी। इसके साथ ही आंचल पाण्डेय का कथक नृत्य, धमतरी की रुखमनी दीवान का लोकमंच, आदित्य मिश्रा बैंड की प्रस्तुति तथा विनीता त्रिपाठी व तेजराम साहू के कलात्मक कार्यक्रम इस आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान करेंगे।

    संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल का संदेश और धरोहरों का संरक्षण

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और लोक परंपराएं हमारी सबसे बड़ी अमूल्य धरोहर हैं। राज्योत्सव इन गौरवशाली परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाने और स्थानीय कलाकारों की छिपी हुई प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों में फैली लोककला की इस अनूठी विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे आयोजनों से न केवल कलाकारों का उत्साहवर्धन होता है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी माटी और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

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