गाजियाबाद| उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। मसूरी थाना क्षेत्र के पास से 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा को अगवा कर दो दरिंदों ने चलती कार में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपी पीड़िता को कार में बंधक बनाकर करीब सात घंटे तक शहर की सड़कों और सुनसान इलाकों में घुमाते रहे और देर रात उसे बदहवास हालत में एनएच-9 के किनारे फेंककर फरार हो गए। पीड़िता अगले दिन किसी तरह रोते-बिलखते अपने घर पहुँची।
मां की शिकायत पर दोनों आरोपी गिरफ्तार
पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, सामूहिक दुष्कर्म और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों मुख्य आरोपियों मुजाहिद (45 वर्ष) और सलीम अख्तर (48 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। पिलखुवा के आजमपुर दहपा गांव के रहने वाले ये दोनों आरोपी आपस में गहरे दोस्त हैं और संयुक्त रूप से ईंट भट्ठे का कारोबार चलाते हैं। मुख्य आरोपी मुजाहिद पिलखुवा क्षेत्र का एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर भी बताया जा रहा है।
पीड़िता की मां ने पुलिस को दी गई जानकारी में बताया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी 27 जुलाई को किसी जरूरी काम से घर से बाहर निकली थी। शाम करीब साढ़े सात बजे जब वह मसूरी थाने के पास एनएच-9 की सर्विस रोड पर किसी वाहन का इंतजार कर रही थी, तब कार में सवार इन दोनों दरिंदों ने उसे अकेला देखकर जबरन अगवा कर लिया।
कार में डराया और दी जान से मारने की धमकी
नाबालिग पीड़िता ने पुलिस को आपबीती बताते हुए कहा कि विरोध करने पर आरोपियों ने उसे बुरी तरह डराया और जान से मारने की धमकी दी। चलती कार के भीतर वह लगातार चीखती रही और खुद को छोड़ने की गुहार लगाती रही, लेकिन दरिंदों ने उसकी एक नहीं सुनी। खास बात यह है कि आरोपियों की कार के शीशों पर डार्क सन शेड (काली फिल्म) लगी हुई थी, जिसके कारण बाहर से कार के भीतर की कोई गतिविधि दिखाई नहीं दे रही थी।
पीड़िता के अनुसार, जब उसने पुलिस में शिकायत करने की बात कही, तो आरोपी घबराकर देर रात ढाई बजे उसे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के पास फेंककर भाग निकले। 28 जुलाई की सुबह एक राहगीर की मदद से वह अपने घर पहुँची। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी अपने घर पहुंचे और इत्मीनान से सो गए। एसीपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कार के नंबर और मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों को पिलखुवा से दबोच लिया गया है और उनकी कार भी बरामद कर ली गई है।
चीखती रही बेटी, सोता रहा सुरक्षा तंत्र
सात घंटे का लंबा वक्त, एक चलती कार और मदद की उम्मीद में टूटता हुआ हर एक पल। 27 जुलाई की रात उस भयानक दरिंदगी का शिकार हुई मासूम को बार-बार यह उम्मीद थी कि शायद आगे कोई पुलिसकर्मी दिखेगा, कोई उसकी चीख सुन लेगा और कार रुकवाकर उसे बचा लेगा। हैरानी की बात यह है कि वह कार उन सात घंटों के दौरान दो बार मसूरी थाने के सामने से गुजरी, रास्ते में कई पुलिस चौकियां और गश्त करती पीसीआर वैन भी मिलीं, लेकिन किसी ने भी उस बेबस बच्ची की चीखें नहीं सुनीं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि दिन के वक्त आम नागरिकों के चार पहिया वाहनों के शीशों से काली फिल्म उतरवाने का दावा करने वाली पुलिस, रात के समय सन शेड लगी संदिग्ध कार को देखकर भी क्यों नहीं चेती? इसके अलावा, घटना के बाद जब पीड़िता न्याय की उम्मीद में पुलिस की चौखट पर पहुँची, तब भी एफआईआर दर्ज होने में चार दिन का लंबा वक्त लग गया, जिसने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फार्म हाउस की भूमिका और जांच के घेरे में लापरवाही
पीड़िता की मां ने मांग की है कि पुलिस को उस सुनसान रास्ते पर बने फार्म हाउस के गार्ड और मालिक से भी कड़ाई से पूछताछ करनी चाहिए, क्योंकि गार्ड ने ही गाड़ी अंदर जाने के लिए गेट खोला था। हालांकि, सदमे की स्थिति में होने के कारण किशोरी फार्म हाउस की सटीक लोकेशन नहीं बता पा रही है, लेकिन पुलिस हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।
परिजनों का आरोप है कि 28 जुलाई की दोपहर को ही थाने में शिकायत दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने टालमटोल रवैया अपनाया और 1 अगस्त को यानी चार दिन बाद तब एफआईआर दर्ज की जब उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही गई। फिलहाल पुलिस सभी बिंदुओं पर साक्ष्य जुटाते हुए मामले की विस्तृत जांच में जुटी है।


