गाजियाबाद/बागपत। बागपत के डौला गांव के रहने वाले 12वीं के छात्र नितिन राणा (18) की गाजियाबाद के लोनी इलाके में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में एक बेहद हैरान करने वाली साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जान से मारने की धमकियां मिलने के बाद नितिन पिछले दो महीने से डर के मारे घर से बाहर नहीं निकला था। लेकिन उसकी जान के पीछे पड़े दुश्मनों ने उसे ढूंढने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर 'भाटी 880' और 'रॉकी गुर्जर' नाम की फर्जी आईडी बनाकर नितिन से दोस्ती की। करीब एक महीने तक बातचीत कर उसका भरोसा जीता और फिर बुधवार को पार्टी करने व नौकरी ढूंढने के बहाने लोनी के सिकरानी गांव बुलाकर उसकी बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी। नितिन का शव स्टेडियम के पास एक ट्यूबवेल के पास बरामद हुआ, जिस पर चार से पांच गोलियों के निशान मिले हैं।
सिर्फ एक 'लिफ्ट' देने की मिली इतनी बड़ी सजा
परिजनों के मुताबिक, करीब दो महीने पहले नितिन ने बसौद गांव की एक लड़की को, जो अपने प्रेमी के साथ जा रही थी, रास्ते में लिफ्ट देकर अग्रवाल मंडी टटीरी तक छोड़ दिया था। इसी बात से नाराज होकर युवती के परिवार वाले नितिन के जानी दुश्मन बन गए। उन्होंने नितिन को कई बार गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी। डर के मारे नितिन ने साधारण कीपैड वाला फोन इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था, लेकिन वह घर के स्मार्टफोन पर इंस्टाग्राम आईडी चलाता था, जो उसकी मौत का जरिया बन गया। गाजियाबाद पुलिस ने जांच के लिए घर का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया है।
साजिश के लिए बेच डाली 6 करोड़ की संपत्ति, छोड़ दिया गांव
इस हत्याकांड के पीछे एक सोची-समझी बड़ी साजिश सामने आई है। बसौद गांव के रहने वाले आरोपी बचन सिंह और उसके बेटे आशुतोष ने नितिन को रास्ते से हटाने का पूरा प्लान तैयार किया था। बदला लेने की सनक में इस परिवार ने डौला नहर पटरी पर स्थित अपना आलीशान फार्महाउस और खेती की जमीन करीब 6 करोड़ रुपये में बेच दी और डेढ़ महीने पहले ही गांव छोड़कर अंडरग्राउंड हो गए थे। हालांकि, उन्होंने जिस युवती के जाने की वजह से नितिन से दुश्मनी पाल रखी थी, उसकी शादी उन्होंने किसी अन्य रिश्तेदार से पहले ही करा दी थी, लेकिन नितिन को लेकर उनकी नफरत खत्म नहीं हुई थी।
हत्यारोपियों के एनकाउंटर की मांग को लेकर अड़े परिजन
नितिन की निर्मम हत्या से गुस्साए परिजनों ने गाजियाबाद में पोस्टमार्टम के बाद शव लेने से साफ मना कर दिया और आरोपियों के एनकाउंटर की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि जब तक दोषियों का खात्मा नहीं होता, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। बाद में बागपत और गाजियाबाद पुलिस के आला अधिकारियों ने दो दिन के भीतर केस का खुलासा करने का ठोस आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शांत हुए और बृहस्पतिवार शाम शव लेकर रवाना हुए।
भाई बोला- "पुलिस से शिकायत करते तो बच जाती जान"
मृतक के भाई चांद ने रोते हुए बताया कि भाई को लगातार धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उन्होंने इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया और सिर्फ खुद ही सतर्क रहने लगे। उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया। चांद ने कहा, "अगर हम समय रहते पुलिस के पास चले जाते, तो आज नितिन हमारे बीच जिंदा होता।" चांद ने यह भी आरोप लगाया कि हत्या में आरोपी आशुतोष की पत्नी भी शामिल है, क्योंकि वारदात के ठीक आधा घंटा पहले उसने पड़ोस में फोन करके पूछा था कि "वहां कुछ हुआ है क्या?"
गाजियाबाद के एसपी सूरज कुमार राय के मुताबिक, यह वारदात लोनी थाना क्षेत्र में हुई है और वहां की पुलिस टीमें लगातार हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। इस मामले में बागपत की सिंघावली अहीर थाना पुलिस भी गाजियाबाद पुलिस का पूरा सहयोग कर रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को दबोच लिया जाएगा।


