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    दुनिया का नक्शा बदलने की ओर बड़ा कदम, UN के प्रस्ताव के साथ खड़ा हुआ भारत; अमेरिका ने किया विरोध

    न्यू यॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व मानचित्र पर महाद्वीपों और भू-भागों के वास्तविक सापेक्ष आकार को अधिक सटीक रूप से प्रदर्शित करने से संबंधित 'करेक्ट द मैप' (Correct the Map) प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। 193 सदस्यीय महासभा में टोगो द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत सहित 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसके विरोध में वोट दिया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे।

    भारतीय राजनयिक ने तकनीकी स्वतंत्रता पर दिया जोर

    संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत इस प्रस्ताव को समान-क्षेत्रफल (Equal-Area) वाले मानचित्र प्रोजेक्शन के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के रूप में देखता है:

    • तकनीकी स्वायत्तता: भारत का समर्थन किसी एक विशेष मानचित्र प्रणाली (जैसे 'इक्वल अर्थ') को अनिवार्य रूप से अपनाने के लिए नहीं है, बल्कि सटीक और संतुलित मानचित्रण को प्रोत्साहित करने के लिए है।

    • समान-क्षेत्रफल प्रणाली: अलग-अलग कार्टोग्राफिक तरीकों से भू-भागों के आकार में अंतर आ जाता है। समान-क्षेत्रफल प्रोजेक्शन से महाद्वीपों का वास्तविक आकार बेहतर तरीके से प्रदर्शित हो सकता है।

    • विकल्प चुनने की छूट: विभिन्न देशों, संस्थानों और विशेषज्ञों को अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त प्रोजेक्शन चुनने की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।

    मौजूदा विश्व मानचित्र और मर्केटर प्रोजेक्शन से जुड़ी चिंताएं

    प्रस्ताव में वर्तमान में सर्वाधिक उपयोग किए जाने वाले 'मर्केटर प्रोजेक्शन' (Mercator Projection) की सीमाओं को रेखांकित किया गया है:

    • 16वीं सदी का मॉडल: 16वीं शताब्दी में समुद्री नेविगेशन के लिए विकसित किया गया मर्केटर मॉडल आज भी शैक्षणिक संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधिकारिक मानचित्रों में प्रयुक्त होता है।

    • आकार में विषमता: यह मॉडल भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों के आकार को अत्यधिक बड़ा दिखाता है, जिससे अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों का वास्तविक आकार तुलनात्मक रूप से छोटा प्रतीत होता है।

    • संतुलित प्रतिनिधित्व: प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मानचित्रों में सभी महाद्वीपों का निष्पक्ष और असंतुलित रहित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

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