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    वेस्टइंडीज की बजाय इंग्लैंड टीम में जगह, क्या है बारबाडोस के इस खिलाड़ी की कहानी?

    क्रिकेट की दुनिया में कई कहानियां ऐसी होती हैं जो किसी फिल्म की कहानी जैसी लगती हैं। जैकब बेथल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 23 अक्तूबर 2003 को कैरिबियाई देश बारबाडोस के शहर ब्रिजटाउन में जन्मे बेथल का बचपन क्रिकेट के माहौल में बीता। यह वही धरती है जिसने दुनिया को महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स जैसा खिलाड़ी दिया। गली क्रिकेट, क्लब मैच और परिवार के साथ अभ्यास, यही उनकी शुरुआती जिंदगी का हिस्सा था।उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़का एक दिन वेस्टइंडीज नहीं, बल्कि इंग्लैंड की जर्सी पहनकर विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत जैसी टीम को चुनौती देगा। अगर किस्मत थोड़ा अलग होती तो बेथल शायद इंग्लैंड नहीं बल्कि वेस्टइंडीज के लिए खेल रहे होते, क्योंकि उनका जन्म और पालन-पोषण, सब कैरेबियाई देश बारबाडोस में हुआ था, लेकिन 13 साल की उम्र में उन्हें इंग्लैंड के नामी रग्बी स्कूल में क्रिकेट स्कॉलरशिप मिली और यहीं से उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई। आइए जैकब बेथल की कहानी जानते हैं…

    परिवार से मिला क्रिकेट का जुनून

    बेथल का क्रिकेट से रिश्ता सिर्फ शौक नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत है। उनके परिवार में क्रिकेट हमेशा से मौजूद रहा। पिता ग्राहम बेथल, बारबाडोस में क्लब क्रिकेट खेल चुके हैं और बेटे के शुरुआती कोच भी रहे।वहीं, दादा आर्थर बेथल, बारबाडोस के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके थे और पिकविक क्लब के कप्तान भी रहे। मां गिसेल बेथल ने बेटे के अभ्यास में अहम भूमिका निभाई और अक्सर घर के आंगन में गेंदबाजी कर जैकब को अभ्यास करवाती थीं। ऐसे माहौल में क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा बन गया।

    13 साल की उम्र में जिंदगी का बड़ा मोड़

    जैकब बेथल की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उन्हें इंग्लैंड के प्रतिष्ठित रग्बी स्कूल में क्रिकेट स्कॉलरशिप मिल गई। महज 13 साल की उम्र में वह बारबाडोस छोड़कर इंग्लैंड चले गए। यह फैसला आसान नहीं था। नई जगह, नई संस्कृति और नई चुनौतियां, लेकिन इसी फैसले ने उनके करियर की दिशा बदल दी। इंग्लैंड पहुंचने के बाद उन्होंने काउंटी क्रिकेट खेलना शुरू किया और जल्द ही वार्विकशायर अकादमी से जुड़ गए। यहीं से उनका क्रिकेट करियर तेजी से आगे बढ़ने लगा। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट साइन किया और 2021 में टी20 ब्लास्ट टूर्नामेंट से अपना डेब्यू किया।

    अंडर-19 वर्ल्ड कप से मिली पहचान

    2022 में खेले गए अंडर-19 विश्व कप ने जैकब बेथल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वह इंग्लैंड की उस अंडर-19 टीम का हिस्सा बने, जिसने विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। क्वार्टरफाइनल में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 42 गेंदों में 88 रन की शानदार पारी खेलकर अपनी पहचान बना ली। इस प्रदर्शन ने दुनिया को बता दिया कि यह खिलाड़ी बड़े मंच के लिए बना है।

    इसके बाद अगले दो वर्षों में उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया। 2024 का साल उनके लिए खास रहा, जब वार्विकशायर के लिए 'टी20 ब्लास्ट' में और बर्मिंघम फीनिक्स के लिए 'द हंड्रेड' टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और उन्हें इंग्लैंड टीम में जगह मिल गई। उनकी प्रतिभा को देखकर दुनिया भर की टी20 फ्रेंचाइजी टीमों की भी नजर उन पर पड़ी। जल्द ही उन्होंने मेलबर्न रेनेगेड्स, पार्ल रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु जैसी टीमों के साथ करार कर लिया।

    आईपीएल में विराट कोहली के साथ साझेदारी

    जैकब बेथल ने 2025 में आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से खेलना शुरू किया। यहां उन्हें भारतीय दिग्गज विराट कोहली के साथ खेलने का मौका मिला। एक मैच में दोनों ने ओपनिंग करते हुए 97 रन की साझेदारी की थी। उस अनुभव को याद करते हुए बेथल ने कहा था, 'विराट कोहली के साथ मैदान पर उतरना मेरे लिए बेहद रोमांचक अनुभव था। बड़े मैचों में उनका रवैया और तैयारी देखकर मैंने बहुत कुछ सीखा।' आईपीएल के अगले सीजन में भी वह आरसीबी के लिए खेलते दिखेंगे।

    खेलने का स्टाइल: निडर बल्लेबाज, उपयोगी गेंदबाज

    जैकब बेथल को एक बैटिंग ऑलराउंडर माना जाता है। वह बाएं हाथ के स्टाइलिश बल्लेबाज हैं जो परिस्थिति के मुताबिक किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। इसके साथ ही उनकी लेफ्ट-आर्म स्पिन गेंदबाजी भी टीम के लिए उपयोगी साबित होती है। फील्डिंग के मामले में भी वह बेहद चुस्त हैं। चाहे इनर सर्कल हो या बाउंड्री लाइन, उनकी फुर्ती अक्सर दर्शकों को हैरान कर देती है। मैदान पर उनकी ऊर्जा और आत्मविश्वास उन्हें अलग बनाता है।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बेथल की एंट्री

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जैकब बेथल का असली परिचय तब हुआ, जब वेल्स के कार्डिफ में उन्होंने दुनिया को अपनी प्रतिभा का एहसास कराया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी और वह इंग्लैंड के लिए अपना दूसरा ही मैच खेल रहे थे, लेकिन मैदान पर उनका आत्मविश्वास किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं था। उस मुकाबले में उन्होंने दुनिया के बेहतरीन व्हाइट-बॉल स्पिनरों में से एक एडम जैम्पा के एक ही ओवर में 20 रन बटोर लिए। इसके बाद उन्होंने लियम लिविंगस्टोन के साथ मिलकर 47 गेंदों में 90 रन की साझेदारी की और 194 रन के मुश्किल लक्ष्य का सफल पीछा करने में अहम भूमिका निभाई। यही वह पारी थी जिसने दुनिया को यह बता दिया कि इंग्लैंड को एक नया आक्रामक बल्लेबाज मिल गया है।

    बेथल ने इस तरह जीता टीम का भरोसा

    इसके बाद कैरेबियाई दौरे पर भी बेथल का बल्ला लगातार बोला। उन्होंने तीन अर्धशतक लगाए और तीनों ही बार नाबाद रहे। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और जल्द ही उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए इंग्लैंड की टेस्ट टीम में शामिल कर लिया गया। उस टेस्ट सीरीज में भी उन्होंने अपनी क्षमता साबित की। उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतारा गया, जबकि नियमित बल्लेबाज ओली पोप को टीम की जरूरत के कारण विकेटकीपर की भूमिका निभाने के लिए नीचे क्रम में भेजा गया। बेथल ने तीनों टेस्ट मैचों में अर्धशतक लगाकर टीम के भरोसे को सही साबित किया।

    इंग्लैंड की टी20 टीम के सबसे युवा कप्तान बने

    उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड क्रिकेट में एक बहस शुरू हो गई कि नंबर तीन की पोजिशन पर आखिर किसे मौका मिलना चाहिए। धीरे-धीरे ओली पोप की भूमिका पर सवाल उठने लगे और 2025-26 एशेज से पहले उनसे उपकप्तानी भी वापस ले ली गई। हालांकि, भारत के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में बेथल को ज्यादा सफलता नहीं मिली और वह अपने इकलौते मैच में प्रभावित नहीं कर पाए। इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट का भरोसा उन पर बना रहा। सितंबर में आयरलैंड दौरे के लिए जब इंग्लैंड की टी20 टीम का एलान हुआ, तो सबको चौंकाते हुए जैकब बेथल को कप्तान बना दिया गया। उस समय उनकी उम्र 21 साल 329 दिन थी, और इसी के साथ वह इंग्लैंड के इतिहास के सबसे युवा टी20 कप्तान बन गए।

    भारत के खिलाफ सेमीफाइनल की ऐतिहासिक पारी

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 253 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना लगभग असंभव लग रहा था, लेकिन जैकब बेथल ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ 48 गेंदों में 105 रन की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में आठ चौके और सात छक्के जड़े। लगभग हर भारतीय गेंदबाज के ओवर में एक न एक बाउंड्री जरूर लगाई। मैदान पर आते ही फाइन लेग पर बुमराह को छक्का जड़ा। इस पारी में बेथल का स्ट्राइक रेट 218 के आसपास रहा।बेथल ने अपना शतक सिर्फ 45 गेंदों में पूरा किया, जो उस समय टी20 विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक था। जब बाकी बल्लेबाज आउट हो रहे थे, तब भी बेथल डटे रहे और इंग्लैंड को मैच में बनाए रखा। मैच आखिरी ओवर तक पहुंच गया। इंग्लैंड को तेज रन चाहिए थे और बेथल स्ट्राइक पर बने रहना चाहते थे। इसी कोशिश में उन्होंने दूसरा रन लेने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से रन आउट हो गए। उनके आउट होते ही इंग्लैंड की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। आखिरकार इंग्लैंड सात विकेट पर 246 रन तक पहुंच पाया और मैच सात रन से हार गया, लेकिन हार के बावजूद बेथल की पारी को टूर्नामेंट की सबसे महान पारियों में से एक माना जा रहा है।

    निजी जिंदगी

    बेथल अपनी निजी जिंदगी को काफी निजी रखते हैं। उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है और वह पूरी तरह अपने क्रिकेट करियर पर ध्यान दे रहे हैं। बेथल मैदान से बाहर बेहद शांत और सरल स्वभाव के हैं। आज जैकब बेथल को इंग्लैंड क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा है। उनकी उम्र अभी सिर्फ 22 साल है, लेकिन उन्होंने जो प्रतिभा दिखाई है, वह बताती है कि आने वाले वर्षों में वह विश्व क्रिकेट के सबसे खतरनाक खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं। बारबाडोस की गलियों से निकलकर इंग्लैंड के लिए खेलने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि सपने कहीं से भी शुरू हो सकते हैं, बस उन्हें पूरा करने की जिद होनी चाहिए।

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