More
    Homeधर्म-समाज3 साल बाद दुर्लभ संयोग, अधिकमास के साथ होगी पुरुषोत्तम मास की...

    3 साल बाद दुर्लभ संयोग, अधिकमास के साथ होगी पुरुषोत्तम मास की पूर्णता, एक छोटा सा उपाय बदल सकता है किस्मत

    हिन्दू धर्म में हर तिथि हर वार का महत्व बताया गया है. इसी प्रकार सनातन परंपरा में अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है, लेकिन जब यह तिथि सोमवार को आती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है. साल 2026 की पहली सोमवती अमावस्या पुरुषोत्तम मास में पड़ रही है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है. मान्यता है कि इस पावन दिन पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य, भगवान शिव की आराधना और पितरों का तर्पण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. यह दिन पितृ कृपा और पुण्य अर्जित करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है.
    उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, सोमवती अमावस्या का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन श्रद्धा और नियम पूर्वक पूजा-पाठ करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है. मान्यता है कि सोमवती अमावस्या का व्रत करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही पितरों की भी कृपा बरसती है.
    कब मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या?
    वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी. इस दिन सुबह का समय स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है

    क्यों मानी जा रही है अमावस्या विशेष?
    पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या को बेहद दुर्लभ और पुण्यदायी संयोग माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह अवसर लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है, जब अधिक मास की अमावस्या सोमवार को पड़ती है. मान्यताओं में इसका विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन पितरों के निमित्त तिल, जल और सफेद पुष्प अर्पित कर तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है. मान्यता है कि इससे पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का के रास्ते खुलते है

    पितृ के साथ देवी-देवताओं बरसाते हैं आर्शीवाद
    पुरुषोत्तम मास को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि इस पवित्र माह में भगवान के साथ पितरों की कृपा भी विशेष रूप से प्राप्त होती है. इसलिए जप, तप, दान, पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. खासकर अमावस्या के दिन किए गए पुण्य कर्म सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं. पितरों का आशीर्वाद पाने और पितृ दोष से मुक्ति के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है.

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here