कोल्हापुर। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले से एक शिक्षक के अद्वितीय समर्पण और बच्चों के भविष्य को संवारने के जज्बे की प्रेरक मिसाल सामने आई है। गगनबावड़ा तालुका के घने वन्य क्षेत्र में बसे कवलटेक धनगरवाड़ा गांव के जिला परिषद स्कूल में जब दुर्गम रास्तों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते कोई भी शिक्षक जाने को तैयार नहीं था, तब शिक्षक जीवन मिथारी ने स्वेच्छा से आगे आकर इन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई।
घने जंगलों और जंगली जानवरों के खतरों के बीच रोजाना का सफर
शिक्षक जीवन मिथारी पिछले 13 वर्षों से निरंतर इस कठिन दिनचर्या का पालन कर रहे हैं। वे अपने निवास 'काले गांव' से प्रतिदिन करीब 28 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। इसके बाद जंगल के मुहाने पर अपना वाहन खड़ा कर 5 किलोमीटर की सीधी और दुर्गम पैदल चढ़ाई करके स्कूल पहुंचते हैं।
यह पांच किलोमीटर का जंगली रास्ता फिसलन, जोंक और तेंदुए, भालू, गौर (जंगली भैंसा) तथा विषैले सांपों जैसे हिंसक वन्यजीवों के खतरों से भरा रहता है। सुरक्षा के लिहाज से वे इस दुर्गम रास्ते पर हेलमेट पहनकर चलते हैं और जंगली जानवरों को सतर्क रखने के लिए रास्ते भर ऊंची आवाज में गाते हुए या आवाजें निकालते हुए सफर तय करते हैं।
मात्र दो सगी बहनों की पढ़ाई के लिए रोजाना खुलता है विद्यालय
कवलटेक धनगरवाड़ा गांव बिजली और बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है। वर्तमान में इस सुदूर बस्ती में केवल तीन ही परिवार निवास कर रहे हैं। इस जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में केवल दो सगी बहनें—8 वर्षीय स्वरा और उसकी 5 वर्षीय छोटी बहन रेशमा—अध्ययनरत हैं। इन दो नन्ही छात्राओं की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए शिक्षक रोजाना इस कठिन यात्रा को पूरा करते हैं।
छात्राओं की माता के अनुसार, पूर्व में इस गांव में करीब 70 परिवार रहते थे, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी और दैनिक जीवन की कठिन परिस्थितियों के चलते अधिकांश लोग कोल्हापुर शहर की ओर पलायन कर गए।
परिजनों ने जताया आभार, बताया बच्चों के भविष्य का आधार
छात्राओं के पिता दगडू बोडके का कहना है कि उनके गांव से दूसरा नजदीकी स्कूल लगभग 8 किलोमीटर दूर है, जहां इन छोटी बच्चियों का रोजाना जाना संभव नहीं था। उन्होंने बताया कि शिक्षक जीवन मिथारी के निस्वार्थ समर्पण और नियमित आने के कारण ही उनकी दोनों बेटियों को बुनियादी शिक्षा मिल पा रही है। विषम परिस्थितियों के बावजूद एक शिक्षक की यह निष्ठा आज पूरे क्षेत्र में सराहना का विषय बनी हुई है।


