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    कांग्रेस में वापसी के संकेत के बाद ACB के छापे

    जयपुर|राजस्थान के पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने अपने आवास और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा की गई छापेमारी के उद्देश्य पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि तलाशी के दौरान कोई भी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। मालवीय ने कहा कि एसीबी टीमों ने उनके घर और एक पेट्रोल पंप समेत तीन स्थानों पर तलाशी ली।बांसवाड़ा में पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि जब मेरे पेट्रोल पंप की तलाशी ली गई, तो क्या मिला? उन्होंने चालान तक नहीं बनाया। उन्होंने इस कार्रवाई में प्रक्रियागत खामियों का आरोप लगाया। पूर्व अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मालवीय के कांग्रेस में वापसी का संकेत देने के दो दिन बाद ये छापे मारे गए।मालवीय ने दावा किया कि परिसर में मौजूद कर्मचारियों से बिना किसी बरामदगी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। उन्होंने पूछा कि अगर कुछ नहीं मिला तो ये छापे मारे ही क्यों गए? सरकार और जांच एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगते हुए उन्होंने कहा कि ये टीमें मेरे घर क्यों भेजी गईं? क्या मुझे गिरफ्तार करने के लिए थीं।स्वच्छ सार्वजनिक जीवन जीने का दावा करते हुए मालवीय ने कहा कि 40 साल से अधिक के राजनीतिक जीवन में मैंने कभी एक रुपया भी रिश्वत के रूप में नहीं लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के लिए कलंक बताया। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा राजनीतिक बदले की भावना से एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि यह सरकार की बात न मानने वाले नेताओं को डराने की कोशिश है।राजस्थान में 12 लाख लखपति दीदी; जानिए अब कौन सा नया लक्ष्य साध रही है सरकारये भी पढ़ें:राजस्थान में डॉक्टर्स को स्वास्थ्य विभाग का अल्टीमेटम, जानिए क्या मामला बांसवाड़ा सीट से पूर्व सांसद और अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मालवीय ने कहा था कि भाजपा सरकार के अधीन काम करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने फिर से कांग्रेस में शामिल होने की संभावना जताई थी। उन्होंने लगभग दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी और अब उन्होंने फिर से कांग्रेस में शामिल होने का संकेत दिया है।मालवीय ने आरोप लगाया था कि एमजीएनआरईजीए जैसी कल्याणकारी योजनाओं में देरी हो रही है। सरकार को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद किसानों को उर्वरक की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

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