More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशसतना में रेत के अवैध उत्खनन पर कार्रवाई, आरोपी के खिलाफ पुलिस...

    सतना में रेत के अवैध उत्खनन पर कार्रवाई, आरोपी के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया केस

    सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट उपवनमंडल के अंतर्गत आने वाले मझगवां वन परिक्षेत्र के पीपरीटोला बीट में वन विभाग की टीम ने रात्रि गश्त के दौरान अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गश्ती दल ने वन क्षेत्र के भीतर अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को मौके पर धर दबोचा। वाहन चालक अर्जुन प्रजापति के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 के प्रावधानों के तहत औपचारिक रूप से वन अपराध का मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संपदा और जंगलों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ इस तरह की कड़ी कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

    रात्रि गश्त के दौरान जंगल के भीतर पकड़ी गई रेत से भरी ट्रॉली

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम जब अपने निर्धारित क्षेत्र में रात्रि गश्त कर रही थी, तभी उन्हें कक्ष क्रमांक 870 के भीतर जंगल के अंदर संदिग्ध रोशनी दिखाई दी। इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए गश्ती दल ने तत्काल मौके पर दबिश दी, जहाँ बिना चालक के एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को अवैध रूप से रेत से लदा हुआ पाया गया। जब इस मामले में आरोपी चालक अर्जुन प्रजापति से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने घरेलू उपयोग के लिए अवैध तरीके से रेत निकालने की बात स्वीकार कर ली, जिसके आधार पर वन कर्मियों ने तुरंत ट्रैक्टर और ट्रॉली को अपने कब्जे में ले लिया। यह पूरी सफल कार्रवाई मझगवां वन परिक्षेत्र के रेंजर रंजन सिंह परिहार के कुशल नेतृत्व में बीटगार्ड गोविंद यादव तथा अन्य वन कर्मियों के सहयोग से पूरी की गई।

    क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा है अवैध खनन का काला कारोबार

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मझगवां ब्लॉक के इस तराई क्षेत्र में अवैध खनन और उत्खनन का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पूर्व भी इस प्रकार की कई अवैध गतिविधियाँ प्रकाश में आती रही हैं। इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली राजस्व और निजी जमीनों से सीमेंट ग्रेड लेटेराइट तथा बॉक्साइट जैसे बेशकीमती खनिजों का बड़े पैमाने पर अवैध खनन धड़ल्ले से किया जाता रहा है। इस अनधिकृत दोहन के कारण न केवल राज्य सरकार के खजाने को भारी-भरकम राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र की नाज़ुक पारिस्थितिकी और पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।

    आपसी विवाद और पूर्व में दर्ज हो चुके हैं आपराधिक मामले

    क्षेत्र में माइनिंग और अवैध उत्खनन का यह गोरखधंधा अक्सर स्थानीय स्तर पर खूनी संघर्ष और विवादों की मुख्य जड़ बनता रहा है। इसी वर्ष जून के महीने में तराई अंचल में अवैध खनन के वर्चस्व को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प और मारपीट की गंभीर घटना सामने आई थी। उस दौरान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों के खिलाफ तेरह जमानती धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए थे, और कुछ ही दिनों के भीतर क्षेत्र से मारपीट तथा विवाद के कई मामले लगातार सामने आए थे, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए थे।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here