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    SC के फैसले पर टिकी नजर, बदला फॉर्म-6 रद्द हुआ तो महाराष्ट्र में बढ़ेगा SIR का दबाव

    मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। राज्य में पिछले एक महीने के भीतर एसआईआर की नई मतदाता सूची में शामिल होने के लिए महज 6 लाख लोगों की ओर से आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि इसके विपरीत ड्राफ्ट रोल से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें लगभग 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे।

    लाखों मतदाताओं का नाम हटना और नए आवेदन

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, ड्राफ्ट सूची से हटाए गए कुल मतदाताओं में से करीब 1.5 करोड़ लोगों को 'अनुपस्थित' या 'अन्यत्र स्थानांतरित' (शिफ्टेड) के रूप में चिह्नित किया गया था। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत इसी कैटेगरी के प्रभावित लोगों से यह उम्मीद की जा रही थी कि वे सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए दोबारा आवेदन करेंगे। इस मौजूदा 6 लाख के कुल आंकड़ाें में उन युवाओं के नए आवेदन भी शामिल हैं जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे हैं, लेकिन कुल ड्राफ्ट से हटाए गए भारी-भरकम आंकड़ों की तुलना में नए आवेदन काफी कम संख्या में आए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच जब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को अपनी कोई मंजूरी नहीं दी थी, तो उसके बाद महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के तमाम अधिकारी अब केंद्रीय चुनाव आयोग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों और जवाब का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अधिकारी यह स्पष्ट होना चाहते हैं कि शीर्ष अदालत के इस रुख के बाद आयोग इस विवादास्पद बदले हुए फॉर्म को रद्द करता है या इसमें क्या संशोधन किए जाते हैं।

    फॉर्म-6 के नए नियमों और मैपिंग की उलझन

    प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि चुनाव आयोग द्वारा इस बदले हुए फॉर्म-6 को पूरी तरह से रद्द कर दिया जाता है, तो एसआईआर सूची में नाम जुड़वाने के लिए आने वाले नए आवेदनों की संख्या में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। दरअसल, मौजूदा संशोधित फॉर्म में एक विशेष घोषणा-पत्र संलग्न करने की अनिवार्य शर्त रखी गई है, जिसमें आवेदक या उसके किसी करीबी रिश्तेदार की वर्ष 2002-03 की पिछली एसआईआर से जुड़ी जानकारी देना आवश्यक होता है। इसी नियम के तहत आवेदक का नाम वर्ष 2002-03 की मूल वोटर लिस्ट से मिलाना यानी मैपिंग करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके कारण आम नागरिकों को आवेदन करने में कई प्रकार की तकनीकी और कागजी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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