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    नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपों को बताया बेबुनियाद, थाने पहुंचा मामला

    जबलपुर। शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी राघवेंद्र दत्त तिवारी ने अपने खिलाफ की गई एक मनगढ़ंत शिकायत, चरित्र हनन और अवैध वसूली (ब्लैकमेलिंग) के प्रयासों के विरोध में पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। एसपी की गैर-मौजूदगी में यह शिकायती पत्र अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सूर्यकांत शर्मा को सौंपा गया। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अनावेदक निशांत लोधी उर्फ राजा और श्रीमती गीता अरोरा ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन पर रोजगार दिलाने के नाम पर 1,10,000 रुपये ऐंठने का झूठा और निराधार आरोप लगाया है। जबकि असलियत यह है कि तिवारी ने अनावेदक की अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जबलपुर पीठ में पूरी तरह कानूनी रूप से एक याचिका दायर करवाई थी, जिसकी वास्तविक वकील फीस केवल 50,000 रुपये थी।

    अदालती दस्तावेजों के साथ पेश किए बेगुनाही के सबूत

    राघवेंद्र दत्त तिवारी ने एएसपी को सौंपे गए अपने आवेदन के साथ पुख्ता अदालती साक्ष्य और विधिक दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। इन सबूतों में प्रदर्श P-1 से P-5 शामिल हैं, जो साफ तौर पर प्रमाणित करते हैं कि उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में केवल कानूनी प्रक्रिया का ही निर्वहन किया था। इस कानूनी पैरवी के बाद कैट (CAT) की जबलपुर बेंच से अनावेदक के पक्ष में फैसला भी आ चुका है। इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया में वकील की वास्तविक फीस 50,000 रुपये तय की गई थी, जिसे अब अनावेदक पक्ष द्वारा जानबूझकर और साजिश के तहत बढ़ाकर 1,10,000 रुपये बताया जा रहा है, जो कि पूरी तरह असत्य है।

    लापरवाही छिपाने के लिए ब्लैकमेलिंग का खेल, एफआईआर की मांग

    मामले में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि अदालत से अपने पक्ष में फैसला आने के बावजूद अनावेदकगण ने आगे की विभागीय कागजी कार्रवाई पूरी नहीं की। अब अपनी इसी घोर लापरवाही पर पर्दा डालने और समाजसेवी को डरा-धमकाकर अवैध धन वसूलने के इरादे से पुलिस महकमे को गुमराह किया जा रहा है।

    राघवेंद्र दत्त तिवारी ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को भ्रमित करने, ब्लैकमेल करने और समाज में उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के एवज में निशांत लोधी और गीता अरोरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने कानून के मुताबिक उचित जांच कर न्यायसंगत कार्रवाई का भरोसा दिया है।

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