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    CM हेल्पलाइन अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप, सचिव की मौत के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन

    विदिशा| मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक ग्राम पंचायत सचिव की दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मौत के बाद स्थानीय सरपंचों, सचिवों और रोजगार सहायकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस घटना के विरोध में सोमवार को तीनों प्रमुख संगठनों ने संयुक्त रूप से एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का समय पर निराकरण कराने के लिए लगातार अत्यधिक मानसिक दबाव बनाया जाता है, जिसके कारण मैदानी कर्मचारियों को भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और मृतक सचिव के पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई है।

    'अधिकारियों का मानसिक दबाव बना मौत का कारण'

    एसडीएम कार्यालय पहुंचे संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि नटेरन तहसील की ग्राम पंचायत घोघरा के सचिव राम सिंह की कुछ दिन पहले एक सड़क हादसे में असामयिक मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक सचिव लगातार भारी प्रशासनिक दबाव के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा था। सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों को तुरंत बंद कराने के लिए उच्चाधिकारियों द्वारा दिन-रात कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है, जिससे उन पर मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी तनाव और दबाव के बीच काम निपटाकर घर लौटते वक्त सचिव सड़क हादसे का शिकार हो गए, जिसके बाद से सभी पंचायत कर्मियों में गहरा रोष व्याप्त है।

    परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग

    सरपंच संघ, सचिव संघ और ग्राम रोजगार सहायक संघ ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन के सामने यह कड़ा रुख रखते हुए मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही, उन्होंने मांग की है कि मृतक सचिव के शोकाकुल परिवार को तुरंत पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए, परिवार के किसी एक आश्रित सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए तथा जांच में यदि किसी भी अधिकारी की लापरवाही या मानसिक प्रताड़ना का मामला साबित होता है, तो उसके विरुद्ध भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

    फिलहाल, प्रशासन की ओर से ज्ञापन स्वीकार कर लिया गया है और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है। अब यह देखना होगा कि पंचायत संगठनों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर प्रशासनिक अमला क्या और कैसी कार्रवाई करता है।

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