अलवर में यूआईटी ने 48 बीघा कृषि भूमि पर हो रही अवैध प्लॉटिंग पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। बिना अनुमोदन कॉलोनी विकसित करने वालों में हड़कंप। अधिकारी बोले—अनधिकृत कॉलोनियों पर अब लगातार सख्त कार्रवाई होगी।
मिशनसच न्यूज, अलवर।
अलवर शहर में अवैध कॉलोनाइज़ेशन पर नकेल कसते हुए नगरीय सुधार न्यास (यूआईटी) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई अंजाम दी। शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित करीब 48 बीघा कृषि भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई इतनी व्यापक थी कि पूरे इलाके में अचानक हड़कंप मच गया। लंबे समय से किसानों की भूमि को बिना अनुमोदन काटकर प्लॉट के रूप में बेचने का खेल यहां सक्रिय था, जिसकी लगातार शिकायतें यूआईटी कार्यालय तक पहुंच रही थीं।
लंबे समय से चल रही थी बिना अनुमति प्लॉटिंग
यूआईटी अधिकारियों के अनुसार, कुछ लोग कृषि श्रेणी वाली जमीन को अवैध रूप से छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर उसको आवासीय प्लॉट बताकर बेच रहे थे।
अधिकारी मानवेंद्र जायसवाल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट पाया गया कि भूमि अभी भी कृषि श्रेणी में दर्ज है। न तो कॉलोनी विकसित करने की अनुमति ली गई थी और न ही कोई लेआउट पास कराया गया था।
इसके बावजूद जमीन पर प्लॉटों की नाप-जोख, सीमांकन और बिक्री खुलेआम की जा रही थी। यह न केवल मास्टर प्लान का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में भूखरीदने वालों के साथ गंभीर धोखाधड़ी की स्थिति भी पैदा करता है।
मौके पर पहुंचते ही चली कार्रवाई
सुबह यूआईटी की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत अवैध निर्माण व प्लॉटिंग के निशानों पर जेसीबी चलाकर सब कुछ ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस का जाब्ता भी तैनात रहा, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या विरोध को नियंत्रित किया जा सके।
कुछ लोगों ने प्लॉटिंग रोकने और कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरा क्षेत्र कृषि भूमि है और यहां किसी भी प्रकार का आवासीय विकास पूरी तरह अवैध है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई बिना किसी रुकावट के पूरी कर ली गई।
भूमिधारकों और दलालों में दहशत
यूआईटी की इस सख्त कार्रवाई के बाद उन भूमिधारकों, दलालों और कॉलोनाइज़र पर असर स्पष्ट दिखाई दिया जो लंबे समय से कृषि भूमि को अवैध कॉलोनी में बदलने का कारोबार कर रहे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में शहर के आसपास अवैध कॉलोनियों का विस्तार तेजी से बढ़ा है, क्योंकि कई लोग खेती की जमीन को आवासीय बताकर लोगों को भ्रमित कर लेते हैं। यूआईटी की इस कार्रवाई ने ऐसे लोगों के मंसूबों पर रोक लगाने का काम किया है।
मानवेंद्र जायसवाल का बयान
“कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग अभी भी ऐसी गतिविधियों में लगे हैं, उनके खिलाफ भी जल्द सख्त कार्रवाई होगी। आम लोगों से अपील है कि किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले उसकी विधिक स्थिति अवश्य जांच लें।”
— मानवेंद्र जायसवाल, यूआईटी अधिकारी
आम जनता से अपील
अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिना अनुमोदन वाली कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले अक्सर भविष्य में बड़ी परेशानी में फँस जाते हैं। इसलिए खरीदते समय भूमि की स्थिति, अनुमोदन, लेआउट और नक्शा अवश्य जांचें।
अलवर यूआईटी की यह कार्रवाई न केवल अवैध कॉलोनाइजेशन के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि आने वाले दिनों में ऐसी गतिविधियों पर और भी कठोर कदम उठाने की शुरुआत मानी जा रही है।


