लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि सीजेपी के व्यापक आंदोलन का विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण करना और सड़क से संसद तक टकराव व हिंसा पैदा करना पूरी तरह अनुचित है।
सरकार और आंदोलनकारियों को मिलकर इस मुद्दे का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान जल्द से जल्द निकालना चाहिए। देश तथा जनहित से जुड़े इन विकट हालातों से निपटने के लिए सरकार और अदालतों जैसी संवैधानिक संस्थाओं को आगे आकर अपनी भूमिका निभानी होगी।
बसपा सुप्रीमो ने बृहस्पतिवार को जारी अपने बयान में स्पष्ट किया कि सीजेपी का दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन चल रहा है। यह विरोध प्रदर्शन नीट जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के कारण छात्र-छात्राओं व उनके परिवारों के तबाह हो रहे भविष्य को लेकर है। इस विषय पर सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मचा हुआ है, और अब इसका राजनीतिकरण होने से यह मामला सरकार के साथ सीधे टकराव का रूप ले चुका है। इस गंभीर स्थिति से देश को बाहर निकालना आवश्यक है क्योंकि इससे केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
सीजेपी का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवारों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है…
मायावती ने आगे जोड़ा कि चाहे अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला हो या फिर अखिल भारतीय और राज्य स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक का मुद्दा, यह सभी घटनाएं भ्रष्टाचार के फलने-फूलने का सीधा परिणाम हैं। यह सीधे तौर पर संवैधानिक नैतिकता से भी जुड़ा हुआ विषय है, जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह अंदर से खोखला करता जा रहा है।


