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    प्रसूताओं की मौत के बीच स्वास्थ्य मंत्री का दावा, सिजेरियन ट्रेंड पर दिया बयान

    जयपुर। राजस्थान के कोटा, बीकानेर और जोधपुर शहरों में प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामलों पर चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली भले ही सवालों के घेरे में हो, लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के पास इस गंभीर समस्या का ठोस समाधान भले न हो, लेकिन उनके विवादित बयानों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में उनका एक नया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के दौर की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) का सामना करने से बचना चाहती है, जो सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन से प्रसव) के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे गंभीर मरीज आते हैं, जिन्हें अन्य जगहों से रेफर किया जाता है।

    जोधपुर, कोटा और बीकानेर के मामलों पर सफाई

    स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने मीडिया से बातचीत में तर्क दिया कि जोधपुर के मामलों को कोटा और बीकानेर की घटनाओं के साथ मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जोधपुर में जिन महिलाओं का स्वास्थ्य बिगड़ा था, उनमें से अधिकांश की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है और सरकार पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रभावित महिलाओं में से छह की हालत ठीक है, जबकि एक महिला को गंभीर डायबिटीज के चलते बेहतर इलाज के लिए एम्स जोधपुर भेजा गया है और एक अन्य महिला का पीलिया का उपचार चल रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है ताकि प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारणों को स्पष्ट किया जा सके।

    सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर जताया भरोसा

    मंत्री ने सरकारी चिकित्सा तंत्र का बचाव करते हुए कहा कि दूर-दराज के इलाकों से महिलाएं बेहद गंभीर और नाजुक हालत में लंबी दूरी तय करके बड़े सरकारी अस्पतालों में पहुंचती हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों का इलाज करना डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना यह भी साबित करता है कि आम जनता का आज भी बड़े सरकारी अस्पतालों और वहां तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों की चिकित्सा सेवाओं पर गहरा विश्वास है।

    पूर्व के बयानों से भी गरमाई थी सियासत

    यह पहली बार नहीं है जब प्रसूताओं की मौतों के संवेदनशील मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री ने ऐसा बयान दिया हो। इससे पहले जब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में हुई प्रसूताओं की मौतों को लेकर मीडिया ने उनसे लापरवाही पर सवाल पूछा था, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा की तरफ इशारा करते हुए मजाकिया लहजे में कह दिया था कि 'बताइए प्रिंसिपल साहब, गर्भवती महिलाएं गंभीर हालत में आई थीं या नाचते हुए आई थीं।' इसी तरह कोटा के मामले पर भी उन्होंने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि महिलाओं को जो ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन लगाए गए थे, उनमें दवा की जगह केवल पानी भरा हुआ था, जिसने स्वास्थ्य महकमे की सजगता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे।

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