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    Homeधर्म-समाजअनंत चतुर्दशी और उसका महत्व

    अनंत चतुर्दशी और उसका महत्व

    हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 25 सितंबर शुक्रवार को पड़ रहा है।  धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन ही 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करने के बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें विदाई देते हैं।
    अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की पूजा करने के बाद विधि-विधान से उनकी प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
     गणेश विसर्जन की विधि इस प्रकार है:
      सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और गणेश जी की पूजा की तैयारी करें।  गणेश जी की प्रतिमा के पास घी का दीपक जलाएं और धूप-दीप अर्पित करें।
        ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें.
        भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, अक्षत, रोली और भोग अर्पित करें।    गणेश जी की आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें।   किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।  इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक विसर्जन के लिए ले जाएं।  प्रतिमा का विसर्जन स्वच्छ जल में करें. घर में स्थापित छोटी और मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन घर पर रखे स्वच्छ जल के पात्र में भी किया जा सकता है।
    क्यों होता है गणेश विसर्जन?
    गणेश उत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और अनंत चतुर्दशी को इसका समापन माना जाता है। इसी वजह से इस दिन गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना के बाद उनकी प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। भक्त ढोल-नगाड़ों और श्रद्धा के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर से आने की कामना करते हैं।

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