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    Homeराज्यछत्तीसगढ़सहायक उपकरणों ने बदली सुकमा बाई की जिंदगी

    सहायक उपकरणों ने बदली सुकमा बाई की जिंदगी

    रायपुर : शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब जरूरतमंदों तक संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पहुंचता है, तब वह केवल सहायता नहीं बल्कि जीवन में नया आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आता है। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के ग्राम उरवाही की 70 वर्षीय सुकमा बाई इसका प्रेरक उदाहरण हैं। एक पैर लकवाग्रस्त होने के कारण लंबे समय से उन्हें चलने-फिरने में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। बिना सहारे घर से बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था और दैनिक कार्यों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।

    सहायक उपकरणों ने बदली सुकमा बाई की जिंदगी

    घर पहुंचकर सुनी समस्या, तत्काल उपलब्ध कराए सहायक उपकरण
            जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग की संयुक्त टीम ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान सुकमा बाई के घर पहुंचकर उनकी स्थिति का गंभीरता से आकलन किया। टीम ने आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने के साथ आय एवं निवास प्रमाण-पत्र बनवाने में भी सहयोग किया। सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद उन्हें घर पर ही वॉकर एवं छड़ी उपलब्ध कराई गई। साथ ही वॉकर का सुरक्षित एवं सही तरीके से उपयोग करने का प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि वे इसका अधिकतम लाभ उठा सकें।

    अब अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं सुकमा बाई
            सहायक उपकरण मिलने के बाद सुकमा बाई के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। अब वे वॉकर और छड़ी की सहायता से पहले की तुलना में अधिक सहजता और आत्मविश्वास के साथ चल-फिर रही हैं। वे अपने कई दैनिक कार्य स्वयं करने लगी हैं तथा अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक स्थानों तक भी आसानी से पहुंच पा रही हैं। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उनका जीवन पहले की अपेक्षा अधिक सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बन गया है।

    अब मुझे फिर से आत्मनिर्भर बनने का हौसला मिला
            सुकमा बाई भावुक होकर कहती हैं कि पहले बिना सहारे घर से बाहर निकलना भी बेहद कठिन था। अब वॉकर और छड़ी की मदद से वे अपने कई कार्य स्वयं कर लेती हैं। उन्हें फिर से आत्मनिर्भर बनने का हौसला मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की इस संवेदनशील पहल ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है और अब वे स्वयं को पहले से अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर महसूस कर रही हैं।

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