More
    Homeदुनियाधरती के बेहद करीब से गुजरेगा एस्टेरॉयड, वैज्ञानिकों ने कहा- खतरे की...

    धरती के बेहद करीब से गुजरेगा एस्टेरॉयड, वैज्ञानिकों ने कहा- खतरे की बात नहीं

    वॉशिंगटन: ब्रह्मांडीय हलचलों के लिहाज से आगामी सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि एक विशालकाय एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) हमारी पृथ्वी के अत्यंत करीब से गुजरने की तैयारी में है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि '2026 जेएच2' (2026 JH2) नाम का यह खगोलीय पिंड चंद्रमा के मुकाबले धरती के बेहद नजदीक से होकर निकलेगा। हालांकि, राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि इस विशाल चट्टान के हमारी पृथ्वी से टकराने का कोई खतरा नहीं है, और यह पूरी तरह सुरक्षित दूरी से निकल जाएगा।

    चंद्रमा से भी चार गुना कम दूरी से गुजरेगा अंतरिक्षीय पिंड

    खगोलविदों के अनुसार, यह एस्टेरॉयड अंतरिक्ष में पृथ्वी से करीब 90,917 किलोमीटर की दूरी से होकर गुजरेगा। यह दूरी सुनने में भले ही बहुत ज्यादा लगे, लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान के पैमाने पर इसे बेहद कम माना जाता है, क्योंकि यह फासला पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की कुल दूरी का मात्र एक चौथाई (चार गुना कम) ही है। इतनी कम दूरी से किसी बड़े एस्टेरॉयड का गुजरना खगोलीय जगत में एक दुर्लभ घटना मानी जाती है, जिसके चलते दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।

    हाल ही में हुई खोज और 'अपोलो क्लास' में वर्गीकरण

    इस एस्टेरॉयड का पता बहुत पहले नहीं, बल्कि हाल ही में अमेरिका के कैनसास और एरिजोना में स्थित स्पेस ऑब्जर्वेटरी (अंतरिक्ष वेधशालाओं) के वैज्ञानिकों ने लगाया है। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने इसे 'अपोलो क्लास' के एस्टेरॉयड की श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इस श्रेणी के एस्टेरॉयड की खास बात यह होती है कि इनका यात्रा मार्ग अंतरिक्ष में सीधे पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) को काटता है। वैज्ञानिक अब तक इस खगोलीय पिंड को 24 बार से अधिक ट्रैक कर चुके हैं, ताकि इसकी गति, दिशा और सटीक रास्ते का अधिक सटीकता से आकलन किया जा सके।

    एक छोटी इमारत के बराबर है आकार, टकराने पर तबाही की क्षमता

    वैज्ञानिकों के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस एस्टेरॉयड की मोटाई लगभग 50 से 100 फीट के बीच हो सकती है, जो कि आकार में किसी छोटी रिहायशी इमारत के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस आकार का कोई भारी पिंड सीधे तौर पर हमारी धरती से टकरा जाए, तो वह पल भर में एक पूरे महानगर को पूरी तरह तबाह करने की विनाशकारी क्षमता रखता है। यही कारण है कि इस आकार के पिंडों को लेकर वैज्ञानिक बेहद गंभीर रहते हैं, लेकिन इस विशिष्ट मामले में खतरे की कोई आशंका नहीं है।

    अगले सौ वर्षों तक सुरक्षित है हमारी पृथ्वी

    नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) समेत वैश्विक स्तर की कई अन्य खगोलीय संस्थाएं इस एस्टेरॉयड की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। अत्याधुनिक कंप्यूटर सिमुलेशन और गणितीय गणनाओं के जरिए वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि अगले 100 सालों तक इस एस्टेरॉयड से पृथ्वी को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। जाने-माने एस्ट्रोनॉमर मार्क नॉरिस जैसे विशेषज्ञों का भी मानना है कि 90,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी अंतरिक्षीय लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित है। वैसे भी हमारी पृथ्वी हर साल अंतरिक्ष में ऐसे कई छोटे पिंडों के करीब से गुजरती है, जिनमें से अधिकांश पृथ्वी के वायुमंडल के घर्षण के कारण हवा में ही जलकर नष्ट हो जाते हैं।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here