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    ‘उद्धव ठाकरे का बेटा होना गलत…’, सांसद के बयान ने बढ़ाई शिवसेना UBT की मुश्किलें

    मुंबई। महाराष्ट्र के प्रमुख विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) में सांसदों के एक बड़े धड़े की बगावत ने राज्य की सियासत में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। विद्रोह करने वाले सांसदों ने शुरुआत में यह अंदेशा जताया था कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर सकते हैं, जिससे वे असहज थे। वहीं, अब असंतुष्ट नेताओं की तरफ से एक और नया दावा सामने आया है कि सांसदों में दल के भीतर बढ़ते परिवारवाद को लेकर भी गहरा असंतोष था। बागी गुट का आरोप है कि उद्धव ठाकरे पुत्र मोह में सिर्फ आदित्य ठाकरे को ही हर जगह आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं, जबकि पार्टी के अन्य योग्य और कर्मठ नेताओं की अनदेखी की जाती है।

    आदित्य ठाकरे की योग्यता और युवा नेतृत्व का जोरदार बचाव

    विद्रोही सांसदों के इन तीखे आरोपों पर उद्धव गुट की ओर से अब कड़ा पलटवार किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने एक विशेष बातचीत में आदित्य ठाकरे का पुरजोर बचाव करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे बेहद प्रतिभावान, उच्च शिक्षित और सूझबूझ वाले नेता हैं। वे भली-भांति जानते हैं कि आज की नई पीढ़ी के साथ किस तरह का संवाद और जुड़ाव स्थापित करना है। देसाई ने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ इसलिए नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में नहीं लाया गया कि वे पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र हैं, बल्कि वे अपनी खुद की राजनैतिक काबिलियत के दम पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

    वंशवाद के मुद्दे पर विपक्षी दलों की कार्यप्रणाली पर दागे सवाल

    पार्टी के भीतर परिवारवाद के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अनिल देसाई ने भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य पर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि निष्पक्षता से देखा जाए, तो देश के लगभग सभी राजनीतिक दलों में इस तरह की स्थिति दिखाई देगी। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्तमान में देश में ऐसा कौन सा राजनैतिक संगठन है, जिसके शीर्ष नेतृत्व ने अपने बेटों, बेटियों या भतीजों को राजनीति में आगे बढ़ाने का काम नहीं किया है। इसलिए केवल एक ही दल को इस विषय पर निशाना बनाना पूरी तरह से अतार्किक और अनुचित है।

    पार्टी छोड़ने का बहाना ढूंढ रहे बागी सांसदों पर तीखा तंज

    सांसद अनिल देसाई से जब दोबारा पूछा गया कि क्या वाकई आदित्य को आगे बढ़ाने में उनके परिवार की कोई भूमिका नहीं है? तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि क्या उद्धव ठाकरे का बेटा होना कोई गुनाह या गलत बात है? उन्होंने बगावत करने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग निजी स्वार्थ, प्रलोभन या लालच के वशीभूत होकर संगठन को धोखा देते हैं, वे अपनी इस दगाबाजी को सही ठहराने के लिए अक्सर इसी तरह के मनगढ़ंत बहाने बनाते हैं। मूल पार्टी को छोड़ने के लिए जनता के सामने कोई न कोई मनगढ़ंत वजह तो पेश करनी ही पड़ती है, इसीलिए परिवारवाद का यह झूठा राग अलापा जा रहा है।

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