अटरू: राजस्थान के बारां जिले के अंतर्गत आने वाले अटरू नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर टिकट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। चुनावी चर्चाओं के केंद्र में कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर का परिवार भी आ गया है, जिससे पार्टी की अंदरूनी राजनीति में नए सवाल खड़े हो गए हैं।
वार्ड नंबर 5 से दावेदारी और पारिवारिक चर्चा
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के अनुज (छोटे भाई) और वर्तमान सरपंच कृष्ण मुरारी दिलावर ने वार्ड नंबर 5 से भाजपा के टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। उनके समर्थकों का ऐसा मानना है कि वे काफी समय से क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक गतिविधियों और जनहित के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता और जनसंपर्क को उनकी दावेदारी का एक मजबूत आधार माना जा रहा है। समर्थकों का यह भी दावा है कि विधानसभा से लेकर वार्ड स्तर तक उनकी पकड़ काफी मजबूत है, जिसके चलते उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में भी प्रमुखता से देखा जा रहा है।
पवन दिलावर के नाम को लेकर उठते सवाल
इस राजनीतिक चर्चा के बीच मंत्री मदन दिलावर के पुत्र पवन दिलावर के भी अटरू नगर पालिका चुनाव मैदान में उतरने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल प्रमुखता से उठाया जा रहा है कि यदि पार्टी चुनाव में बहुमत हासिल करती है, तो क्या अध्यक्ष पद की कमान इसी परिवार के किसी सदस्य को सौंपी जाएगी। हालांकि, इस संबंध में संगठन या पार्टी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या घोषणा नहीं की गई है, और वास्तविक स्थिति टिकटों के आधिकारिक वितरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जमीनी कार्यकर्ताओं में बढ़ती हलचल
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर गहरी चर्चा है कि किसी भी निकाय चुनाव में जमीनी संगठन और कार्यकर्ताओं की मेहनत सबसे अहम होती है। ऐसी स्थिति में यदि किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाती है, तो वर्षों से पार्टी संगठन के लिए निष्ठापूर्वक काम कर रहे आम कार्यकर्ताओं के अवसर सीमित होने की आशंका पैदा हो जाती है। कार्यकर्ताओं के मन में अब यह बड़ा सवाल है कि पार्टी टिकट बांटते वक्त राजनीतिक प्रभाव को प्राथमिकता देगी या फिर संगठनात्मक सक्रियता और वार्ड स्तर पर जनता के बीच स्वीकार्यता को परखेंगी।
भाजपा के सामने संतुलन साधने की कड़ी चुनौती
मौजूदा हालात को देखते हुए अटरू में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी संभावित दावेदारों के बीच उचित तालमेल और संतुलन बनाने की है। एक तरफ कृष्ण मुरारी दिलावर की जमीनी सक्रियता और कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव उनकी ताकत बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ पवन दिलावर के नाम की चर्चा ने पार्टी के भीतर बहस को और तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अटरू में टिकट का यह फैसला केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर स्थानीय संगठन के मनोबल और भविष्य की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ेगा। फिलहाल पार्टी ने टिकट को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और सभी संभावित उम्मीदवारों के आवेदनों तथा संगठनात्मक फीडबैक पर मंथन जारी है।


