मुंबई। त्योहारों के सीजन में होने वाले अत्यधिक ध्वनि और वायु प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। गणेशोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान आए इस कड़े फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उत्सवों के दौरान लाउडस्पीकर, डीजे और लेजर बीम का अंधाधुंध इस्तेमाल पूरी तरह से अनुचित और असहनीय है।
सड़कों पर पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में दिन हो या रात, सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी परिस्थिति में पटाखे फोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट के मुताबिक इस तरह की गतिविधियों से शहर में खतरनाक स्तर का प्रदूषण और जहरीली धुंध फैलती है, जिससे आम नागरिकों का जीना मुहाल हो जाता है।
क्या कहती है हाईकोर्ट की खंडपीठ?
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'क्या इन सभी लाउडस्पीकरों और पटाखों का इस्तेमाल करने से हमें भगवान का कोई अतिरिक्त आशीर्वाद मिल जाएगा? एक जिम्मेदार समाज के रूप में हमें इन हानिकारक तौर-तरीकों को अब बंद कर देना चाहिए।' अदालत ने प्रसिद्ध पंढरपुर की 'वारी' यात्रा का बेहतरीन उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि वह धार्मिक यात्रा कितनी शांति और अनुशासन के साथ बिना किसी लाउडस्पीकर या शोर-शराबे के संपन्न होती है।
जनस्वास्थ्य और नियमों से समझौता नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति या आयोजक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और अर्थदंड वसूला जाए ताकि उल्लंघनकर्ताओं में कानून का डर बना रहे। पीठ ने साफ किया कि न्यायपालिका किसी भी उत्सव या पर्व के खिलाफ नहीं है, लेकिन कोई भी जश्न नागरिकों की सेहत, सुरक्षा और कानून के नियमों की कीमत पर नहीं मनाया जा सकता। धार्मिक भावनाओं के सम्मान और जनसुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।


