भोपाल। मध्य प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में जेम पोर्टल तथा स्थानीय टेंडर और कोटेशन प्रक्रियाओं के माध्यम से की गई खरीदारी में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली और अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। शासन को प्रस्तुत विभागीय जांच रिपोर्ट के गहन विश्लेषण से पता चला है कि प्रदेश के आठ संभागों के बासठ मामलों में कुल एक सौ छियालीस अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई है। इन मामलों में तय प्रक्रिया को दरकिनार कर अत्यधिक महंगी दरों पर सामग्री क्रय करने, वित्तीय स्वीकृतियों के बिना खरीदारी और व्यापक प्रशासनिक लापरवाही बरते जाने की पुष्टि हुई है।
विभिन्न संभागों में सामने आई धांधली की स्थिति

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर संभाग में सर्वाधिक सोलह मामलों में बत्तीस अधिकारी व कर्मचारी जांच के घेरे में आए हैं। इसके अलावा शहडोल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर संभागों में भी दर्जनों अधिकारियों व कर्मचारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। उदाहरण के तौर पर सिवनी नगर पालिका में हाईमास्ट लाइटों और सौंदर्यीकरण सामग्री की दो करोड़ रुपये से अधिक की नियमविरुद्ध खरीदी, कोटर नगर परिषद में वाटर टैंकर क्रय में गड़बड़ी तथा गुना नगर पालिका में बिना सक्षम अनुमति कचरा वाहनों के सौदों से जुड़ी अनियमितताएं रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल हैं।
दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और करोड़ों के नुकसान का ब्योरा
जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने सात दोषी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है, जबकि छिहत्तर मामलों में वेतनवृद्धियां रोकने अथवा निरस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सत्रह सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन तथा महंगाई राहत में कटौती की गई है एवं अड़तीस मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश दिए गए हैं। निवाड़ी, पेटलावद और शहडोल क्षेत्र की विभिन्न निकायों में नियमविरुद्ध आवंटन और क्रय प्रक्रियाओं से सरकार को करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान पहुंचा है। इस पूरे प्रकरण के बीच भोपाल के भौंरी में आयोजित एक विभागीय समीक्षा बैठक का वीडियो भी चर्चा में है, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस तरह की घोर लापरवाही पर मातहत अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते नजर आ रहे हैं।


