बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के श्रीराम अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान पुलिस आरक्षक की हुई संदिग्ध मौत का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतक जवान के बेबस पिता ने अब जिला कलेक्टर के नाम एक भावुक और सख्त शिकायती पत्र भेजा है। पीड़ित पिता ने सरकार से परिवार के भरण-पोषण के लिए एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति (मुआवजा) राशि देने, अस्पताल प्रबंधन और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा सरकारी नौकरी देने की गुहार लगाई है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगों पर त्वरित अमल नहीं हुआ, तो वे अपने बेटे के शव को कब्र से बाहर निकालकर सड़क पर चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन करने को विवश होंगे।
इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल में हुआ था बवाल
गौरतलब है कि बिलासपुर के सरकंडा थाने में तैनात आरक्षक सत्य कुमार पाटले को कुछ दिनों पूर्व पथरी की शिकायत के बाद इलाज के लिए श्रीराम अस्पताल में दाखिल कराया गया था। हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया। जवान की असमय मौत से आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर गलत 'लाइन ऑफ ट्रीटमेंट' और इलाज में घोर लापरवाही बरतने के संगीन आरोप लगाए थे, जिसके बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी।
कमाने वाला इकलौता बेटा था, न्याय की आस में बूढ़ा पिता
इसी दुखद घटनाक्रम में अब मृतक सत्य कुमार पाटले के पिता छत राम पाटले ने सीधे कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में अपनी दयनीय घरेलू स्थिति का हवाला देते हुए लिखा कि उनके पूरे परिवार में सत्य कुमार ही एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जिनके जाने के बाद अब पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा हो चुके परिवार को आर्थिक सहारा दिया जाए और अस्पताल के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि इस गंभीर चेतावनी के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है।
सीएमएचओ और स्वास्थ्य विभाग ने बैठाई उच्च स्तरीय जांच कमेटी
आरक्षक की मौत के बाद उपजे जनाक्रोश को देखते हुए बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए डॉक्टरों की एक विशेष कमेटी (जांच दल) का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी इस बात की सूक्ष्मता से जांच कर रही है कि इलाज के दौरान अस्पताल के भीतर क्या परिस्थितियां थीं और क्या सच में डॉक्टरों या स्टाफ की तरफ से कोई कोताही बरती गई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और जांच समिति के निष्कर्षों के सामने आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


