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    महाराष्ट्र की नई लॉजिस्टिक्स नीति में बदलाव, 400 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    मुंबई। महाराष्ट्र को एक ग्लोबल मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र लॉजिस्टिक्स नीति-2024’ में कई अहम संशोधन किए हैं। उद्योग, निवेश, सेवा एवं खनन विभाग ने इस नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पूरी नीति को अमलीजामा पहनाने के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये के वित्तीय और बजटीय प्रावधान पर मुहर लगाई गई है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, माल ढुलाई पर आने वाली लागत और समय की बचत होगी, आधुनिक गोदामों का जाल बिछेगा और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। संशोधित नीति के तहत लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या पर लगी जिला-स्तरीय सीमा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

    170 लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने का लक्ष्य

    नई संशोधित नीति के अंतर्गत पूरे राज्य में विभिन्न श्रेणियों के कुल 170 लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें 100 छोटे, 30 बड़े, 20 विशाल, 10 अति विशाल, पांच बहुमंजिला विशाल और पांच बहुमंजिला अति विशाल पार्क शामिल किए गए हैं। पार्कों के वर्गीकरण के लिए भूमि क्षेत्र और स्थिर पूंजी निवेश के स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं। इसके अलावा आधुनिक वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, इंटीग्रेटेड ट्रक टर्मिनल, फ्री ट्रेड एंड वेयरहाउसिंग जोन और मल्टी-लेवल लॉजिस्टिक्स पार्कों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। सभी प्रकार की मंजूरियों, पंजीयन और सब्सिडी के दावों को पारदर्शी व सरल बनाने के लिए ‘मैत्री’ डिजिटल सिंगल विंडो पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। प्रशासनिक कसावट लाने के वास्ते राज्यस्तरीय समितियों के ढांचे में भी जरूरी बदलाव किए गए हैं।

    परियोजनाओं के लिए 40 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी

    पात्र लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट्स को उनके स्थिर पूंजी निवेश के अनुपात में आर्थिक सहायता देने का प्रावधान तय किया गया है:

    • छोटे लॉजिस्टिक्स पार्क: निवेश का 20 प्रतिशत, अधिकतम 2 करोड़ रुपये।

    • बड़े लॉजिस्टिक्स पार्क: निवेश का 15 प्रतिशत, अधिकतम 15 करोड़ रुपये।

    • विशाल लॉजिस्टिक्स पार्क: निवेश का 15 प्रतिशत, अधिकतम 30 करोड़ रुपये।

    • अति विशाल लॉजिस्टिक्स पार्क: निवेश का 10 प्रतिशत, अधिकतम 40 करोड़ रुपये।

    • इंटीग्रेटेड ट्रक टर्मिनल: निवेश का 20 प्रतिशत, अधिकतम 1 करोड़ रुपये।

    विदर्भ, मराठवाड़ा और राज्य के अन्य चुनिंदा पिछड़े क्षेत्रों में लगने वाली पात्र इकाइयों को विशेष रियायतें देने का भी प्रावधान है। हालांकि, इन सभी प्रोत्साहनों का वास्तविक लाभ संबंधित पात्रता शर्तों, विभागीय स्वीकृतियों और फंड की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

    स्टांप ड्यूटी और बिजली बिल में भारी छूट

    संशोधित नीति के अनुसार, जोन-1 और जोन-2 के अंतर्गत आने वाले लॉजिस्टिक्स पार्कों को स्टांप ड्यूटी में पूरे 100 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि जोन-3 की परियोजनाओं को 75 प्रतिशत राहत दी जाएगी। इसके अतिरिक्त बिजली शुल्क से भी लंबी अवधि की राहत दी गई है। जोन-1 व जोन-2 की पात्र इकाइयों को 15 साल तक और जोन-3 की इकाइयों को 10 साल तक बिजली ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। पालघर और धुले जिलों को जोन-1 में शामिल किए जाने से इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के तेजी से विकास की उम्मीद है।

    एमएसएमई इकाइयों और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा

    भूमि की लागत को छोड़कर 50 करोड़ रुपये तक का निवेश करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी इस नीति के दायरे में विशेष लाभ दिए जाएंगे। मान्यता प्राप्त लॉजिस्टिक्स पार्कों के भीतर स्थित पात्र इकाइयों को 75 प्रतिशत और पार्कों के बाहर स्थित इकाइयों को 50 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट मिलेगी। साथ ही, पात्र उद्योगों को ब्याज दरों में भी राहत मिल सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और डिजिटल वेयरहाउस मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए 25 प्रतिशत वित्तीय सहायता, जिसकी अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये है, प्रदान की जाएगी।

    बुनियादी ढांचे और हरित पहलों के लिए अतिरिक्त सहायता

    पात्र परियोजनाओं को सड़क और जलापूर्ति की अंतिम छोर (लास्ट माइल) कनेक्टिविटी विकसित करने के वास्ते 5 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है। सड़कों की चौड़ाई के आधार पर अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) देने का भी प्रावधान है। इसके अलावा, ग्रीन लॉजिस्टिक्स पार्कों को प्रोत्साहित करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल, वेस्ट वाटर रीसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा। तय मानकों को पूरा करने वाली परियोजनाओं को मूल सब्सिडी के अलावा 10 प्रतिशत यानी अधिकतम 4 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकेगा।

     

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