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    MP के सीहोर में क्लोरीन गैस लीक, कई लोगों को सांस लेने में हुई दिक्कत

    सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले अंतर्गत लसूड़िया खास गांव में काहिरी बांध के समीप बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हुए क्लोरीन गैस रिसाव के दो दिन बाद अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। मंगलवार देर रात सिलेंडरों के स्थानांतरण के दौरान फैली गैस के कारण स्थानीय ग्रामीणों को आंखों में जलन और सांस लेने में गंभीर तकलीफ का सामना करना पड़ा था। घटना के बाद पुलिस व नगर पालिका प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्लांट से जोखिम बने सिलेंडरों को बाहर भिजवा दिया है, यद्यपि रिसाव के मुख्य कारणों की जांच प्रक्रिया अभी जारी है।

    गैस की चपेट में आए 8-10 लोग, 4 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती

    रिसाव के तुरंत बाद लसूड़िया खास और आसपास के रिहाइशी इलाकों से लगभग आठ से दस ग्रामीण सीहोर जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में उपचार हेतु पहुंचे। जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. हरिओम गुप्ता के अनुसार, मरीजों ने मुख्य रूप से आंखों में तेज चुभन, गले में खराश और घुटन की शिकायत की थी। डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए चार प्रभावित लोगों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा है, जबकि शेष लोगों को प्राथमिक उपचार के पश्चात घर भेज दिया गया। फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति खतरे से बाहर और स्थिर बनी हुई है।

    नागदा से आई विशेषज्ञ टीम ने सुरक्षित हटाए तीनों क्लोरीन सिलेंडर

    घटना के उपरांत मुख्य सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए प्लांट परिसर में रखे तीनों क्लोरीन सिलेंडरों को वहां से हटाने की कार्रवाई पूरी की गई। सीहोर नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुधीर सिंह ने स्पष्ट किया कि नागदा स्थित ग्रासिम कंपनी की विशेष तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया था। इस विशेषज्ञ दल ने पूर्ण सतर्कता बरतते हुए तीनों सिलेंडरों को सुरक्षित रूप से ट्रक में लोड कर ट्रीटमेंट प्लांट से बाहर भेज दिया है, जिससे क्षेत्र में बना तात्कालिक खतरा अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।

    घटना के कारणों को लेकर ग्रामीणों और प्रशासनिक दावों में मतभेद

    क्लोरीन रिसाव की वास्तविक वजहों को लेकर स्थानीय निवासियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बयानों में भिन्नता देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सिलेंडरों से गैस निष्कासन अथवा शिफ्टिंग की प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही के कारण ही क्लोरीन का प्रभाव गांव की सीमा तक पहुंचा और लोगों का दम घुटने लगा। इसके विपरीत नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि तकनीकी टीम ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए काम किया था। बहरहाल, रिसाव किस बिंदु से हुआ और कितनी मात्रा में गैस का उत्सर्जन हुआ, इसकी सटीक जानकारी विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    क्लोरीन गैस के दुष्प्रभाव और बचाव के आवश्यक उपाय

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वायुमंडल में क्लोरीन गैस का रिसाव होने पर मानव शरीर में तुरंत आंखों में तीखी जलन, खांसी, सांस फूलना और गले में अवरोध जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसी स्थिति निर्मित होने पर नागरिकों को बिना देरी किए प्रभावित क्षेत्र से निकलकर किसी खुले तथा हवादार स्थान पर पहुंचना चाहिए। यदि आंखों में जलन महसूस हो तो उन्हें स्वच्छ शीतल जल से धोना चाहिए और सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होने पर तुरंत निकटतम चिकित्सीय केंद्र से संपर्क साधना चाहिए। इसके अतिरिक्त गैस से प्रभावित कपड़ों को अविलंब बदलकर शरीर को पानी से साफ करना भी सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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