नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा शुक्रवार को जंतर-मंतर पर बुलाए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद रहीं। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते राजधानी की सभी सीमाओं और प्रमुख मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस से कई प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया।
बड़े राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई
सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली हवाई अड्डे पर ही हिरासत में ले लिया। इसके अलावा, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और नेता योगेंद्र यादव भी नजर आए, जिनकी हिरासत वाली बस को सफदरजंग हवाई अड्डा फ्लाईओवर पर रोका गया। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने अपने समर्थकों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोपाल राय और उनके समर्थकों को भी हिरासत में ले लिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और धारा 163 लागू
राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक कदम उठाए गए। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली के 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया और कुछ चुनिंदा इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बाधित की गईं। डीसीपी स्पेशल सेल चैतन्य ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इंडिया गेट और आसपास के इलाकों में हालात पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं और कहीं भी भीड़ जमा नहीं होने दी गई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है और जनता का पूरा सहयोग मिल रहा है।
विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रियाएं
प्रशासनिक सख्ती पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा कि भारी सुरक्षा बल और कड़े प्रतिबंध इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान के अधिकार को लेकर चिंतित है। पुलिस और सुरक्षा बलों की चौकसी के चलते राजधानी में किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।


