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    अमरनाथ यात्रा का समापन और चंद्र ग्रहण एक साथ: सावन पूर्णिमा पर बना दुर्लभ संयोग, जानें ग्रहण का असर और सूतक काल

    सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को सावन पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 28 अगस्त दिन शुक्रवार को है. इस बार सावन पूर्णिमा का दिन बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस शुभ दिन पर अमरनाथ यात्रा का समापन होगा और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस वजह से सावन पूर्णिमा का दिन धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है. अमरनाथ यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की तरफ चल रही है और 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर छड़ी मुबारक के साथ बाबा अमरनाथ की गुफा में पूजा और दर्शन के बाद यात्रा का समापन हो जाएगा. अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या चंद्र ग्रहण का अमरनाथ यात्रा के समापन पर कोई असर पड़ेगा, आइए जानते हैं…

    3 घंटे 18 मिनट का चंद्र ग्रहण – 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर लगने वाला चंद्र ग्रहण आंशिक ग्रहण होगा. भारतीय समय के अनुसार इसका आंशिक चरण सुबह करीब 8:04 बजे से शुरू होकर 11:22 बजे तक रहेगा और ग्रहण का अधिकतम प्रभाव करीब 9:43 बजे होगा. चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट की रहने वाली है. हालांकि उस समय भारत में दिन और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होने के कारण इसे यहां से देखा नहीं जा सकेगा. चूंकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. ग्रहण का भारत में दिखाई ना देने की वजह से अमरनाथ यात्रा के समापन की पूजा-अर्चना और रक्षाबंधन के पर्व पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा.

    कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में चंद्र ग्रहण – पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सावन पूर्णिमा के दिन लगने वाला साल का अंतिम चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा. इस दौरान चंद्रमा का बड़ा भाग पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा. इस दौरान चंद्रमा गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आने लगेगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा. इस बार सावन पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भफी मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा को भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प से जुड़े पर्व के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है. बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं.

    28 अगस्त को छड़ी मुबारक के साथ अमरनाथ यात्रा समापन – पवित्र छड़ी 22 अगस्त दिन शनिवार को श्री अमरनाथ गुफा के लिए मुख्य यात्रा पर रवाना हो चुकी है. 22 और 23 अगस्त के बीच पहलगाम 24 अगस्त को चंदनवाड़ी, 25 अगस्त को शेषनाग तथा 26 और 27 अगस्त की रात को पंचतरणी में रात्रि विश्राम होगा. फिर 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के अवसर पर बाबा की पवित्र गुफा में पूजा और दर्शन के साथ छड़ी मुबारक यात्रा का समापन हो जाएगा. साल 2026 की श्रीअमरनाथजी यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक ही रही. सावन के दौरान बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु कठिन पहाड़ी यात्रा करते हैं.

    हिम शिवलिंग का भक्त करते हैं दर्शन – अमरनाथ की पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग को भगवान शिव का स्वरूप मानकर श्रद्धालु दर्शन और पूजा करते हैं. अमरनाथ यात्रा का संबंध सावन और पूर्णिमा से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है. यात्रा के दौरान श्रद्धालु पहलगाम या बालटाल मार्ग से पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं. आधिकारिक जानकारी के अनुसार पहलगाम मार्ग चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए पवित्र गुफा तक जाता है, जबकि बालटाल मार्ग से भी गुफा तक पहुंचा जाता है.

    चंद्र ग्रहण का संयोग धार्मिक पंचांग के लिहाज से विशेष – इस तरह 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन, अमरनाथ यात्रा का समापन और साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का संयोग इसे धार्मिक पंचांग के लिहाज से विशेष बना देता है. हालांकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सामान्य धार्मिक पर्व और रक्षाबंधन की परंपराएं पंचांग के अनुसार निभाई जा सकेंगी.

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