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    छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ की साजिश बेनकाब, गुप्त क्लास में लिखवाए गए सवाल-जवाब

    परीक्षा पर राजस्थान के प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली की प्रतिक्रिया http://नीट पेपर लीक आरोपी का भाजपा कनेक्शन उजागर, भाजपा के बयानवीरों को अब सांप सूंघा: टीकाराम जूली https://missionsach.com/नीट-पेपर-लीक-आरोपी-का-भाजप.html– 

    पुणे से पकड़ा गया आरोपी, छात्रों को डिक्टेट करके रटवाए गए असली सवाल-जवाब

    पुणे। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा करते हुए कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है। पुणे निवासी कुलकर्णी एक सेवानिवृत्त केमिस्ट्री शिक्षक हैं, जिन पर परीक्षा से पहले चुनिंदा छात्रों को गोपनीय तरीके से प्रश्न और उनके उत्तर याद करवाने का आरोप है।

    इस वर्ष करीब 22 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।

    घर में चलती थी गुप्त ‘स्पेशल क्लास’

    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जांच में सामने आया कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने अपनी सहयोगी मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर कुछ छात्रों का गुप्त समूह तैयार किया था। एजेंसी के अनुसार, पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने प्रश्नपत्र की कोई डिजिटल कॉपी या प्रिंटआउट साझा नहीं किया।

    इसके बजाय, पुणे स्थित घर पर विशेष क्लास आयोजित कर छात्रों को सवाल और उनके सही जवाब बोल-बोलकर लिखवाए गए। छात्रों ने इन प्रश्नों को अपनी कॉपियों में हाथ से नोट किया।

    छापेमारी के दौरान बरामद हस्तलिखित नोट्स कथित तौर पर नीट-यूजी 2026 के वास्तविक केमिस्ट्री प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए हैं।

    NTA सिस्टम की जानकारी का उठाया फायदा

    महाराष्ट्र के लातूर निवासी पीवी कुलकर्णी एक प्रतिष्ठित कॉलेज में केमिस्ट्री प्रोफेसर रह चुके हैं और लगभग चार वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्हें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया की गहरी जानकारी थी और इसी का फायदा उठाकर उन्होंने गोपनीय प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई।

    हालांकि CBI ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रश्नपत्र आखिर किस माध्यम से लीक हुआ।

    राजस्थान से खुला मामला, कई राज्यों में छापेमारी

    इस पूरे मामले की जांच CBI ने 12 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की शिकायत के बाद अपने हाथ में ली थी। शुरुआती गड़बड़ी 7 मई को राजस्थान में सामने आई थी।

    इसके बाद एजेंसी ने जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहमदनगर समेत कई शहरों में छापेमारी कर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।

    बिचौलियों का सिंडिकेट सक्रिय, कोचिंग संस्थान भी जांच के घेरे में

    जांच में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। CBI के अनुसार, बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क छात्रों से भारी रकम लेकर उन्हें कुलकर्णी की ‘स्पेशल क्लास’ तक पहुंचा रहा था।

    इसी कड़ी में रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC) भी जांच एजेंसी के रडार पर है। CBI की टीम ने संस्थान संचालक शिवराज मोटेगांवकर से लंबी पूछताछ की है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क में कोचिंग संस्थान की भूमिका कितनी गहरी थी।

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