नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी और बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को दुष्यंत कुमार गौतम द्वारा सिक्किम के राज्यपाल पद की शपथ लिए जाने के साथ ही इस मामले ने नया तूल पकड़ लिया है। इस नियुक्ति के तुरंत बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखे हमले करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि दुष्यंत गौतम को उच्च संवैधानिक पद पर बैठाकर एक तरह से संरक्षण दिया जा रहा है ताकि इस बहुचर्चित मामले में कानूनी शिकंजे से बचा जा सके। हालांकि, स्पष्ट रहे कि यह सभी आरोप कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए हैं और किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में उनके दोषी होने की पुष्टि नहीं की गई है।
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस पार्टी की महासचिव और उत्तराखंड मामलों की प्रभारी कुमारी सैलजा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का नाम एक अत्यंत संवेदनशील और बड़े विवाद से जोड़ा जा रहा है, उसे सिक्किम राजभवन की शोभा बढ़ाने के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस जघन्य हत्याकांड की शिकार अंकिता भंडारी को आज तक पूर्ण न्याय क्यों नहीं मिल सका है। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस प्रकरण से जुड़ी कुछ कथित ऑडियो क्लिप्स भी सामने आई थीं और एक रसूखदार 'वीआईपी' का नाम भी चर्चा में आया था, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठती रही है। पार्टी का यह भी आरोप है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले के हर पहलू और वीआईपी एंगल की तह तक जाकर पड़ताल नहीं की है।
क्या था उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड
यह पूरा दुखद प्रकरण उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित 'वनंतरा रिजॉर्ट' से जुड़ा है, जहाँ अंकिता भंडारी एक रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। सितंबर 2022 की 18 तारीख को उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी, और घटना के चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। इस सनसनीखेज मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी और रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य—जो कि भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य के पुत्र हैं—तथा उनके दो अन्य साथियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे उत्तराखंड राज्य में बड़े पैमाने पर आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।
वीआईपी एंगल और जांच की सुस्त गति को लेकर सवाल
हत्याकांड के शुरुआती दौर से ही मामले में किसी अज्ञात 'वीआईपी' के शामिल होने की चर्चाएं और आरोप तूल पकड़ते रहे हैं। मृतका के परिजनों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस पहलू की गहराई से जाँच कराए जाने की पुरजोर माँग की थी। इसी संदर्भ में अब दुष्यंत गौतम का नाम भी विपक्षी दलों द्वारा उठाया जा रहा है। कांग्रेस ने यह आरोप लगाया है कि जिस वीआईपी का जिक्र बार-बार सामने आता रहा है, उससे कभी गहन पूछताछ क्यों नहीं की गई। पार्टी ने यह भी सवाल किया है कि आखिर इस मामले में केंद्रीय एजेंसियां और सरकार इस दिशा में खामोश क्यों हैं।
राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राहुल गांधी ने की थी पुनर्विचार की माँग
इस विवाद के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र प्रेषित किया था। इस पत्र में उन्होंने दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्त किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का औपचारिक आग्रह किया था। राहुल गांधी का तर्क था कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े तमाम अनसुलझे पहलुओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस प्रकार की उच्च संवैधानिक नियुक्तियों को रोका जाना चाहिए। उन्होंने महामहिम से अनुरोध किया था कि सरकार को इस नियुक्ति की सलाह पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया जाए। इन्ही घटनाक्रमों के बीच सोमवार को दुष्यंत गौतम ने सिक्किम के राज्यपाल के रूप में अपने पद की शपथ ग्रहण कर ली है।


