नासिक: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा खुले खाद्य तेल (कुकिंग ऑयल) की बिक्री पर रोक लगाने के कड़े फैसले के खिलाफ अब व्यापारियों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि यह निर्णय छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक रूप से भारी संकट पैदा करने वाला है, जिसका वे कड़ा विरोध कर रहे हैं।
नासिक में खाद्य तेल व्यापारियों की अहम बैठक
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के इस आदेश के विरोध में नासिक शहर में खाद्य तेल व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए व्यापारी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
व्यापारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खुले तेल की बिक्री पर अचानक रोक लगाने से छोटे दुकानदारों और उनसे जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। इस मुद्दे पर चर्चा के बाद व्यापारियों ने निर्णय लिया है कि वे सरकार के इस आदेश को अदालत में चुनौती देंगे। साथ ही, राज्य सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि इस समयावधि में फैसला वापस नहीं लिया गया, तो राज्यभर के व्यापारी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। इसके अलावा, इस पूरे मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाने का फैसला किया गया है।
'क्या हम आतंकवादी हैं?' — व्यापारियों का फूटा गुस्सा
बैठक के दौरान व्यापारियों ने प्रस्तावित भारी-भरकम जुर्माने और जेल भेजने की कार्रवाई को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि खुले तेल की बिक्री के मामले में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल जैसी सख्त सजा का प्रावधान क्यों किया जा रहा है? उन्होंने रोष जताते हुए सरकार से तीखे लहजे में सवाल किया, 'क्या हम आतंकवादी हैं?'
व्यापारियों का तर्क है कि खुले खाद्य तेल की बिक्री का व्यवसाय वर्षों से पारंपरिक रूप से चला आ रहा है। इस पर अचानक प्रतिबंध लगाने से छोटे व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा।
ग्राहकों पर भी पड़ेगा अतिरिक्त आर्थिक बोझ
व्यापारी संगठनों ने यह भी दावा किया कि खुले तेल की बिक्री से आम उपभोक्ताओं को काफी फायदा मिलता था, क्योंकि उन्हें ब्रांडेड पैक्ड खाद्य तेल की तुलना में यह कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हो जाता था। यदि खुले तेल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लग जाती है और केवल महंगे पैक्ड तेल की ही बिक्री अनिवार्य की जाती है, तो उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि किसी भी प्रकार का नीतिगत निर्णय लेने से पहले व्यापारियों और आम ग्राहकों, दोनों के हितों का गंभीरता से ध्यान रखा जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि व्यापारियों के इस कड़े विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बीच राज्य सरकार और एफडीए इस मामले में क्या रुख अपनाता है।


