सूरत। गुजरात के सूरत शहर की साइबर अपराध शाखा ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की रकम को नकदी में बदलने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 43 वर्षीय आरोपी को हिरासत में लिया है। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी दीन मोहम्मद शेख के रूप में हुई है, जो वर्तमान में सूरत के भेस्तान इलाके में रह रहा था। पुलिस जांच में इस पूरे साइबर गिरोह के तार झारखंड के जामताड़ा नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं।
मैलिशियस फाइल से बैंक खाता खाली
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक अज्ञात स्रोत से भेजी गई एपीके फाइल को पीड़ित के फोन में इंस्टॉल करवा दिया गया। इस फाइल में मौजूद मैलवेयर की सहायता से साइबर अपराधियों ने फोन का गोपनीय डेटा और बैंकिंग जानकारियां चुरा लीं। इसके बाद पीड़ित की जानकारी के बिना उसके बैंक खाते से सिलसिलेवार आठ लेन-देन करते हुए 6,31,414.68 रुपये की चपत लगा दी गई। पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद सूरत पुलिस ने मामले की तकनीकी पड़ताल शुरू की।
क्रेडिट कार्ड से बिल भुगतान और नकदीकरण का खेल
पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) बिशाखा जैन और इंस्पेक्टर वी.डी. मंडोरा की टीम द्वारा की गई जांच में सामने आया कि आरोपी शेख ने इस गबन के पैसे को खपाने के लिए अपने एक्सिस बैंक और केनरा बैंक के क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल किया था। लगभग 2.28 लाख रुपये की राशि से विभिन्न बिलों का भुगतान किया गया। इसके एवज में आरोपी 10 प्रतिशत की कमीशन काटकर शेष रकम को नकद में बदलता था और फिर उसे कैश डिपॉजिट मशीनों के जरिए जामताड़ा में बैठे मुख्य सरगनाओं के बैंक खातों में स्थानांतरित कर देता था।
कानूनी कार्रवाई और साइबर सेल की सतर्कता सलाह
साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब जामताड़ा में सक्रिय गिरोह के मुख्य सूत्रधारों तक पहुंचने के लिए आगे की कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर अथवा सोशल मीडिया संदेश के जरिए प्राप्त होने वाली अनजान फाइलों या संदिग्ध अटैचमेंट को अपने फोन में कभी भी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें, बल्कि ऐसे नंबरों को तत्काल ब्लॉक कर पुलिस को सूचित करें।


