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    डीग हादसा: घरेलू LPG सिलेंडर फटा, गांव में हड़कंप

    डीग (कामां)। डीग जिले के कामां कस्बे में अक्खड़वाड़ी मैदान के पास स्थित नवीन बस स्टैंड के सामने एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ एक कोल्ड ड्रिंक सप्लायर की दुकान पर ईको वैन में अवैध रूप से एलपीजी गैस रिफिलिंग की जा रही थी, तभी अचानक सिलेंडरों में भीषण ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के आठ लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से इलाज के दौरान दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई।

    अवैध रिफिलिंग बनी काल, उजड़ गई पिता की दुनिया

    पुलिस जांच के अनुसार, दुकान मालिक द्वारा दो ईको वैन में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से अवैध रूप से गैस भरी जा रही थी। इन्हीं गाड़ियों से गांवों में कोल्ड ड्रिंक की सप्लाई होती थी। रिफिलिंग के दौरान अचानक सिलेंडरों ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते ब्लास्ट हो गया। आग इतनी विकराल थी कि उसने दुकान के ऊपर बने रिहायशी मकान को भी अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में घायल 11 वर्षीय मासूम बच्ची अफसरा और उसके 8 वर्षीय भाई लक्ष्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों मृतक बच्चे चचेरे भाई भगवान सिंह के थे, जो खुद भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

    आधा घंटा देरी से पहुंची दमकल, लोगों में भारी आक्रोश

    प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि आग लगते ही तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम और दमकल विभाग को सूचना दी गई थी। इसके बावजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ी करीब आधा घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। दमकल की इस लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की यह सुस्ती पहली बार नहीं देखी गई है, बल्कि हर बड़े हादसे में दमकल की देरी बड़ी तबाही का कारण बनती है।

    प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी: 'लगा जैसे जमीन फट गई हो'

    हादसे में झुलसे मनमोहन सिंह ने आपबीती बताते हुए कहा कि धमाका इतना तेज था कि वह दुकान से करीब 20 मीटर दूर जाकर गिरे। उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो पैरों के नीचे से जमीन फट गई हो। वहीं, एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि धमाके से ठीक एक मिनट पहले घटनास्थल के सामने से दो रोडवेज बसें गुजरी थीं, गनीमत रही कि सिलेंडर उड़कर बसों की तरफ नहीं गए, वरना हताहतों का आंकड़ा और भयावह हो सकता था। तेज धमाके के कारण आसपास के घरों में कंपन हुआ, जिससे दहशत में आकर लोग सड़कों पर भागने लगे।

    रेफरल केंद्र बने अस्पताल, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

    इस हादसे ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। डीग जिला बनने के बाद भी कामां और डीग के सरकारी अस्पतालों में 'बर्न वार्ड' तक की सुविधा नहीं है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को 54 किलोमीटर दूर भरतपुर रेफर करना पड़ता है, जिससे इलाज में डेढ़ से दो घंटे की देरी हो जाती है। एडिशनल एसपी दिनेश कुमार यादव ने बताया कि जांच में दोनों गाड़ियों में अवैध एलपीजी किट मिली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण पूरे जिले में अवैध गैस रिफिलिंग का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जो आए दिन ऐसे बड़े हादसों को दावत दे रहा है।

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