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    Homeराज्यबिहारलोन लेकर नहीं शुरू किया बिजनेस, अब होगा एक्शन

    लोन लेकर नहीं शुरू किया बिजनेस, अब होगा एक्शन

    भागलपुर। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का उद्देश्य जहां युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। 

    वहीं अब यह योजना कुछ लाभुकों की लापरवाही और फर्जीवाड़े का शिकार बनती दिख रही है। जिले में चयनित 250 लाभुकों ने चार लाख रुपये की पहली किस्त लेने के बाद उद्योग स्थापित नहीं किया। अब ऐसे लाभुकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

    जिला उद्योग केंद्र द्वारा प्रारंभिक जांच में 11 ऐसे लाभुकों की पहचान की गई है, जिन्होंने योजना का लाभ उठाकर राशि तो ले ली, लेकिन न तो मशीन खरीदी और न ही शेड निर्माण किया।

    इन पर अब सर्टिफिकेट केस दायर किया जा रहा है। जिला उद्योग महाप्रबंधक खुशबू कुमारी ने संबंधित लाभुकों की सूची जिला नीलाम पदाधिकारी को सौंप दी है। आगे की कार्रवाई के तहत इन पर पीडीआर एक्ट के तहत वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

    वर्ष 2021-22 में चयनित इन लाभुकों को डीपीआर के अनुसार पहली किस्त के रूप में चार लाख रुपये दिए गए थे।

    योजना की शर्तों के अनुसार, इस राशि का उपयोग संबंधित परियोजना जैसे मशीन, शेड निर्माण व अन्य आवश्यक संरचनाओं पर करना था। लेकिन विभागीय सत्यापन में यह पाया गया कि लाभुकों ने न तो निर्माण कार्य किया और न ही कोई उपयोगिता प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड किया।

    नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। जिला उद्योग महाप्रबंधक के अनुसार, अब तक मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत 450 यूनिट कार्यरत हैं।

    इनमें 237 लाभुक ही समय पर किस्त चुका रहे हैं। बाकी ने या तो मशीन ही नहीं लगाई या दूसरों से मशीन लगवाकर दिखाया।

    कुछ लाभुकों द्वारा विभागीय कर्मियों पर दबाव बनाने की शिकायतें भी आई हैं। उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने योजना का लाभ लेकर उसका दुरुपयोग किया है, उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

    विभाग ने अपील की है कि सभी लाभुक योजना के तहत दिए गए धन का सदुपयोग करें और नियमानुसार समय पर ऋण की अदायगी करें।

    इन लाभुकों पर हो रही कार्रवाई
    पहले चरण में जिन 11 लाभुकों पर सख्त कार्रवाई हो रही है, उनमें जगदीशपुर के गुंजन कुमार (गेट-ग्रील निर्माण), वसीउल्लाह (स्टेशनरी उत्पादन), किश्वर परवीन (आटा-सत्तू-बेसन), अंजार आलम (कसीदाकारी), नाथनगर की पूनम कुमारी (ढाबा-होटल), नुसरत खातून (कसीदाकारी), राजीव कुमार (यूपीएस-इन्वर्टर), पीरपैंती के रवि शंकर ठाकुर (मुर्गा दाना), रंगरा की अनुप्रिया कुमारी (पेवर ब्लॉक-टाइल्स), सुलतानगंज के कुमार मनीष और कहलगांव के अजय कुमार (आईटी व्यवसाय) शामिल हैं।

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