मुंबई: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जैन मठ की हथिनी महादेवी उर्फ माधुरी को वापस लाने की मांग के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। बुधवार को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वनतारा के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुलाकात की। इसमें हाथिनी की वापसी को लेकर संवेदनशील और कानूनी रूप से संतुलित रास्ता निकालने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि वनतारा ने राज्य सरकार के प्रयासों को पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वनतारा ने भरोसा दिलाया है कि वह उस याचिका का हिस्सा बनेगा। जिसे महाराष्ट्र सरकार महादेवी हाथिनी (माधुरी) को सुरक्षित रूप से नंदनी मठ वापस लाने के लिए दायर करने जा रही है। उधर दिल्ली में शिवसेना के नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाया। वनतारा के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया था। उनका मकसद हाथिनी को अपने पास रखने का नहीं था, बल्कि अदालत के निर्देश के अनुसार उसकी तुरंत चिकित्सा, व्यवहारिक देखभाल और भलाई सुनिश्चित करना था।
फडणवीस ने दिया बड़ा अपडेट
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी बताया कि वनतारा ने राज्य सरकार को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है, ताकि कोल्हापुर जिले के नंदनी मठ के पास वन विभाग द्वारा तय की गई जगह पर महादेवी के लिए एक पुनर्वास केंद्र बनाया जा सके। वनतारा ने एक बयान में कहा है कि यह निर्णय दिखाता है कि वनतारा ने न सिर्फ अदालत के आदेशों का ईमानदारी से पालन किया, बल्कि कोल्हापुर के लोगों की भावनाओं का भी पूरा सम्मान किया है। महादेवी की सेहत, सुरक्षा और भावनात्मक स्थिति को प्राथमिकता देकर वनतारा ने करुणा और संस्कृति के सम्मान के बीच एक सुंदर संतुलन दिखाया है। यह साझा प्रयास न सिर्फ कानून और भावनाओं को जोड़ता है, बल्कि महादेवी (माधुरी) को एक सुरक्षित, स्नेहमयी और गरिमापूर्ण भविष्य देता है। कोल्हापुर के लोगों के लिए यह एक भावनात्मक सुकून की घड़ी है। महादेवी नाम की हथिनी को जुलाई महीने के आखिर में कोल्हापुर से गुजरात जामनगर ले जाया गया था। इसके बाद लोगों का आक्रोश सामने आया था। बाद में लोगों के आंदोलन को साधु संतों का भी समर्थन मिल गया था। इसके बाद स्थानीय नेताओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस के सामने यह मुद्दा उठाया था। तब सीएम फडणवीस ने कहा था कि नंदनी मठ के साथ सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगी।
वनतारा ने कहा, पीड़ा हुई तो माफ करें
वनतारा ने एक बयान में कहा है कि हम यह भलीभांति समझते हैं कि जैन मठ और कोल्हापुर के लोगों के लिए महादेवी (माधुरी) एक गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का विषय हैं। दशकों से वह आध्यात्मिक परंपराओं और सामाजिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा रही हैं। हम श्रद्धालुओं, जैन मठ के नेतृत्व और व्यापक समुदाय की भावनाओं, चिंताओं और माधुरी से जुड़ी गहराई को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं। इस विषय में वनतारा की भूमिका केवल माननीय सुप्रीम कोर्ट और माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने तक ही सीमित रही है। यदि न्यायालय अनुमति देता है, तो वनतारा माधुरी की सुरक्षित और गरिमामयी वापसी के लिए संपूर्ण तकनीकी और पशु चिकित्सा सहायता प्रदान करेगा। वनतारा ने बयान में कहा है कि यदि हमारी उपस्थिति जो कि पूरी तरह न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही रही है। किसी भी रूप में जैन समुदाय या कोल्हापुर के लोगों के लिए पीड़ा का कारण बनी हो, तो हम अपनी गहन क्षमा याचना करते हैं। इससे पहले अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में बेकाबू हुए हाथियों को संभालने और उनकी मानसिक स्थिति ठीक करने में भी वनतारा ने हाथ बढ़ाया था। तब हाथियों के वनतारा ले जाया गया था।


