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    बिहार में ‘घर तक डॉक्टर’ अभियान शुरू, 90 दिनों में 6 करोड़ लोगों की होगी स्क्रीनिंग

    पटना। बिहार सरकार ने राज्यवासियों को गंभीर बीमारियों से बचाने और शुरुआती स्तर पर ही सटीक उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान का शुभारंभ किया और सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    अभियान की मुख्य बातें और कार्ययोजना

    यह विशेष स्वास्थ्य अभियान 2 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा:

    • लक्ष्य एवं दायरा: इसके तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ नागरिकों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कर उनका डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

    • घर-घर जांच: स्वास्थ्यकर्मी घर-घर पहुंचकर प्राथमिक जांच और चिकित्सकीय परामर्श देंगे। आवश्यकतानुसार मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला अस्पतालों तक उपचार के लिए भेजा जाएगा।

    • गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग: अभियान में मुख्य रूप से मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), सामान्य कैंसर, हृदय रोग, श्वसन संबंधी रोग और फैटी लिवर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की समय पूर्व पहचान की जाएगी।

    • एनीमिया स्क्रीनिंग: इसके अतिरिक्त राज्य में 1 करोड़ लोगों की एनीमिया जांच का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    अस्पतालों की क्षमता विस्तार और 'मिशन कायाकल्प'

    राज्य में प्राथमिक से लेकर जिला स्तर तक चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं की गईं:

    • सर्जरी और सेवाओं में विस्तार: जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में सर्जरी के दायरे को 36 से बढ़ाकर 45 बीमारियों के लिए कर दिया गया है। जून में जहां 2,428 ऑपरेशन हुए थे, वहीं वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 8,000 से अधिक हो गई है, जिससे बड़े अस्पतालों में रेफरल के मामलों में कमी आई है।

    • 'मिशन कायाकल्प': प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (APHC) और उप-स्वास्थ्य केंद्रों (सब-सेंटर्स) की बुनियादी व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए ‘मिशन कायाकल्प’ शुरू होगा।

    • वैश्विक रोजगार के अवसर: नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें।

    कार्यक्रम के अंत में सभी जिलाधिकारियों को अभियान की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि तय समयसीमा में शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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