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    मध्यप्रदेश में डोल ग्यारस की धूम, डोल और झांकियों के साथ जीवंत होंगी परंपराएं

    भोपाल। मध्य प्रदेश में आज डोल ग्यारस का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न शहरों में भव्य चल समारोह, झांकियां और डोल निकाले जाने की पूरी तैयारी है। डोल ग्यारस को 'दान एकादशी' के रूप में भी जाना जाता है, और हिंदू धर्म में इस दिन पूजा-पाठ के साथ दान-पुण्य करने का विशेष महत्व माना गया है। उज्जैन और इंदौर से लेकर देवास और राजधानी भोपाल तक धार्मिक आयोजनों को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

    उज्जैन में निकलेगी बाबा काल भैरव की राजसी सवारी

    धार्मिक नगरी उज्जैन में डोल ग्यारस के मौके पर नगर कोतवाल और भगवान महाकाल के सेनापति कहे जाने वाले बाबा काल भैरव की सवारी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहती है। आज शाम 4 बजे बाबा काल भैरव की सवारी अपने मंदिर से राजसी अंदाज में नगर भ्रमण के लिए निकलेगी। इसके अलावा, शहर के विभिन्न क्षेत्रों से फूलडोल चल समारोह और आकर्षक झांकियां हरसिद्धि मंदिर पहुंचेंगी। इनमें मक्सी रोड के किशनपुरा से निकलने वाला बैरवा समाज का चल समारोह और अन्य अखाड़ों द्वारा निकाली जाने वाली 30 से अधिक झांकियां शामिल हैं।

    इंदौर में जगह-जगह सजेगी झांकियां और अखाड़े

    व्यापारिक नगरी इंदौर में आज शहर के अलग-अलग हिस्सों से कई भव्य चल समारोह निकाले जाएंगे। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है।

    • विभिन्न समाजों और अखाड़ों की झांकियां: सिद्धेश्वर हनुमान व्यायाम शाला से शाम 6 बजे निकलने वाले डोल में श्री कृष्ण-राधा की झांकी और बालिकाओं द्वारा शस्त्र कला का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके अलावा जूना रिसाला से लोधी समाज, कुम्हारखाड़ी से प्रजापति समाज, राजकुमार मिल धर्मशाला से कोष्टी समाज (बाबा नीम करौली की झांकी) और परदेशीपुरा से देवांग कोष्टी समाज का 132 साल पुराना पारंपरिक चल समारोह निकाला जाएगा।

    देवास के हाटपिपल्या में 150 साल पुरानी परंपरा और अनूठा शकुन

    मध्य प्रदेश के देवास जिले के हाटपिपल्या में डोल ग्यारस पर डेढ़ सौ साल पुरानी अनोखी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। यहाँ भगवान नरसिंह के मंदिर से भगवान की प्रतिमा को नगर भ्रमण के बाद चासिया मार्ग स्थित भमोरी नदी के नरसिंह घाट ले जाया जाता है। वहाँ प्रशासनिक गार्ड ऑफ ऑनर के बाद मुख्य पुजारी द्वारा करीब साढ़े सात किलो वजनी पाषाण की प्रतिमा को नदी के पानी में तीन बार उतारा जाता है।

    इस परंपरा से जुड़ी मान्यता के अनुसार, प्रतिमा के तैरने या डूबने से आगामी वर्ष के संकेत तय होते हैं:

    • तीनों बार तैरना: पूरा वर्ष सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम फसल का संकेत।

    • दो बार तैरना और एक बार डूबना: साल के 8 महीने अच्छे और 4 महीने सामान्य/कठिन।

    • एक बार तैरना और दो बार डूबना: 4 महीने अच्छे और 8 महीने संघर्षपूर्ण।

    • तीनों बार डूब जाना: अशुभ संकेत, जिसे सूखे, अकाल और प्राकृतिक आपदा से जोड़ा जाता है।

    राजधानी भोपाल में ट्रैफिक डायवर्जन

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी डोल ग्यारस पर भव्य जुलूस निकाला जाएगा। इसे ध्यान में रखते हुए यातायात पुलिस ने दोपहर 1 बजे से विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया है। चौक बाजार से खटलापुरा मंदिर तक जुलूस के रूट पर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। भारत टॉकीज से न्यू मार्केट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

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