More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशत्यौहारों के मौसम में बांधवगढ़ के वन्यप्राणी भी मना रहे उत्सव

    त्यौहारों के मौसम में बांधवगढ़ के वन्यप्राणी भी मना रहे उत्सव

    भोपाल : शरद ऋतु के आगमन के साथ ही नागरिकों के साथ ही वन्य प्राणियों के लिये भी त्यौहारों का मौसम आ गया है। नई उम्मीदों और नवीनता के आरंभ के पर्व दीपावली पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वनों में भी वन्यजीवों की आमद-ओ-रफ्त बढ़ रही है। हाथी, गौर, गिद्ध और बारहसिंगा के संरक्षण, पुनर्स्थापन तथा नए प्राकृतिक आवासों में उनके अनुकूलन पर जोर दिया जा रहा है।

    बांधवगढ़ के वनों में वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी से यहां जैव विविधता समृद्ध हो रही है, और पारिस्थितिक संतुलन भी बेहतर हो रहा है। कभी इस क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुके वन्यजीवों का दोबारा प्राकृतिक वातावरण में फलना-फूलना विभाग के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस दीपावली बांधवगढ़ के वनों से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का यह संदेश प्रसारित हो रहा है, “जब वन्यजीवों को सुरक्षित आश्रय और अनुकूल वातावरण मिलता है, तो जंगलों में जीवन लौटता है, नई पीढ़ियां पनपती हैं और प्रकृति फिर से खुशहाल हो उठती है”।

    गौर की चहल-कदमी से लौटी रौनक

    बांधवगढ़ के वनों से विलुप्तप्राय गौर वन वन्यजीव संरक्षण और पुनर्स्थापन के सतत प्रयासों से यहां पुनर्स्थापित हो चुके हैं। इनकी बढ़ती मौजूदगी वन पारिस्थितिकी और जैव विविधता को समृद्ध कर रहे हैं।

    हाथियों ने बनाया बांधवगढ़ को अपना घर

    वर्ष 2018 में बांधवगढ़ पहुंचे हाथियों ने धीरे-धीरे यहां के जंगलों को अपना नया आवास बना लिया। समय के साथ स्थानीय वातावरण के अनुकूल ढलते हुए हाथी आज बांधवगढ़ के वन्यजीव संसार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

    गिद्धों को मिला सुरक्षित आशियाना

    प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाने वाले गिद्धों को बांधवगढ़ की सुरक्षित चट्टानों और जंगलों में अनुकूल आश्रय मिला है। पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। सुरक्षित आवास और संरक्षण के प्रयास गिद्धों के अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

    बारहसिंगा के पुनर्स्थापन की पहल

    बांधवगढ़ में बारहसिंगा के पुनर्स्थापन की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत कान्हा टाइगर रिजर्व से बारहसिंगा लाकर सुरक्षित बाड़े में रखा गया है, जहां उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल भविष्य में उनके लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हाथी, गौर, गिद्ध और बारहसिंगा से जुड़ी ये चारों कहानियां बताती हैं कि निरंतर संरक्षण प्रयासों और सुरक्षित आवासों के माध्यम से वन्यजीवों को नया जीवन और नई संभावनाएं मिल सकती हैं। इनकी मौजूदगी से बांधवगढ़ की प्राकृतिक समृद्धि बढ़ने के साथ ही प्रकृति पर्यटन की संभावनाओं को भी नई दिशा मिल रही है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here