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    बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने की कवायद तेज, सरकार जल्द बनाएगी उच्च-स्तरीय समिति

    नई दिल्ली: देश की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग' विषय पर एक उच्च-स्तरीय समिति का बहुत जल्द गठन करने जा रही है। इस विशेष समिति का मुख्य उद्देश्य देश के संपूर्ण बैंकिंग क्षेत्र की गहन और व्यापक समीक्षा करना है।

    वित्त मंत्री ने यह अहम जानकारी 'पीएसबी कॉन्फ्लुएंस' (PSB Confluence) को संबोधित करते हुए साझा की। उन्होंने कहा कि इस समिति के गठन की आधिकारिक घोषणा शीघ्र ही होने की पूरी उम्मीद है। यह उच्च-स्तरीय समिति बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अपने बहुमूल्य विचार, सुझाव और सिफारिशें सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी। उल्लेखनीय है कि निर्मला सीतारमण ने गत 1 फरवरी 2026 को अपने केंद्रीय बजट भाषण के दौरान ही इस समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था। इस पहल का प्रमुख लक्ष्य बैंकिंग सेक्टर को भारत के आगामी आर्थिक विकास के चरण के साथ पूरी तरह संरेखित करना है। इसके साथ ही, इसका कार्य वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण के दायरे को सुरक्षित रखना भी होगा। भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिहाज से बैंकिंग प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में यह एक बेहद अहम कदम है, जिसके जरिए सरकार बैंकिंग तंत्र को भविष्य की हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार करना चाहती है।

    समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    इस उच्च-स्तरीय समिति का प्राथमिक उद्देश्य देश के बैंकिंग क्षेत्र की सूक्ष्मता से गहन समीक्षा करना है। यह समिति यह सुनिश्चित करने का काम करेगी कि हमारी बैंकिंग प्रणाली भारत के राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के पूर्णतः अनुरूप हो। देश में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना इसका एक प्रमुख कार्य होगा। इसके अलावा, यह वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी अपना विशेष ध्यान केंद्रित करेगी।

    केंद्रीय बजट में क्या रखा गया था प्रस्ताव?

    वित्त मंत्री ने 1 फरवरी 2026 के अपने बजट भाषण में इस समिति को बनाए जाने का प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने तब स्पष्ट किया था कि यह समिति बैंकिंग क्षेत्र के कामकाज की व्यापक समीक्षा करेगी। इसका मुख्य लक्ष्य भारत की अगली विकास यात्रा के साथ बैंकिंग व्यवस्था को मजबूती से जोड़ना है। इसके दायरे में वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना, सेवाओं का विस्तार करना और उपभोक्ता संरक्षण को पूरी तरह सुरक्षित रखना भी शामिल है।

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