More
    Homeदुनियाआइंस्टीन के सिद्धांत पर फिर लगी मुहर, 100 साल बाद मिली नई...

    आइंस्टीन के सिद्धांत पर फिर लगी मुहर, 100 साल बाद मिली नई वैज्ञानिक पुष्टि

    वाशिंगटन। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की लगभग एक सदी पहले प्रस्तुत की गई जनरल रिलेटिविटी थ्योरी एक बार फिर वैज्ञानिकों की सबसे कठिन परीक्षा में खरी उतरी है। लीगो-वर्गो-कागरा (एलवीके) सहयोग से जुड़े वैज्ञानिकों ने अब तक का सबसे व्यापक अध्ययन करते हुए ब्लैक होल के विलय से उत्पन्न 168 ग्रेविटेशनल वेव्स का विश्लेषण किया। इस शोध में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जो आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण संबंधी सिद्धांत को गलत साबित कर सके। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि ब्रह्मांड की सबसे चरम परिस्थितियों में भी जनरल रिलेटिविटी के सिद्धांत सटीक रूप से लागू होते हैं।

    168 ग्रेविटेशनल वेव्स का व्यापक विश्लेषण

    इस शोध में 77 नई ग्रेविटेशनल वेव घटनाओं और पूर्व में दर्ज 91 ब्लैक होल विलय के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। ग्रेविटेशनल वेव्स अंतरिक्ष और समय के ताने-बाने में उत्पन्न होने वाली अत्यंत सूक्ष्म तरंगें होती हैं, जो विशाल खगोलीय पिंडों या ब्लैक होल के विलय के दौरान पैदा होती हैं। आइंस्टीन द्वारा वर्ष 1916 में की गई भविष्यवाणी के बाद इन्हें पहली बार 2015 में प्रत्यक्ष रूप से दर्ज किया गया था। इस नए अध्ययन ने गुरुत्वाकर्षण से जुड़े अन्य वैकल्पिक सिद्धांतों की संभावनाओं को काफी हद तक सीमित कर दिया है।

    'रिंगडाउन' चरण और ऐतिहासिक खगोलीय घटनाएं

    अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल के एक-दूसरे के करीब आने, टकराने और विलय के बाद नए ब्लैक होल के स्थिर होने तक की पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण किया। विशेष रूप से ‘रिंगडाउन’ चरण का गहराई से अध्ययन किया गया, जिसमें नया बना ब्लैक होल स्थिर होने से पहले कंपन करता है। इस प्रक्रिया में 'जीडब्ल्यू 250114' नामक अब तक का सबसे शक्तिशाली ग्रेविटेशनल वेव संकेत दर्ज किया गया। इसके अलावा 'जीडब्ल्यू 240621' घटना में नए बने ब्लैक होल के कंपनों को रिकॉर्ड करने में सफलता मिली।

    भारतीय वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान

    इस अंतरराष्ट्रीय शोध में भारत की ओर से भी बड़ी भागीदारी रही। लीगो-इंडिया साइंटिफिक कोलेबोरेशन के तहत 17 भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों ने डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक समीक्षा में अहम भूमिका निभाई। पुणे स्थित 'इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स' के वैज्ञानिक डॉ. अप्रतिम गांगुली ने इस शोध प्रकाशन की संपादकीय टीम का नेतृत्व किया। भविष्य में लीगो-इंडिया के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ने के बाद इस क्षेत्र में भारत का योगदान और अधिक विस्तृत होने की संभावना है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here