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    फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र गिरोह का पर्दाफाश, STF जांच में बड़ा खुलासा

    लखनऊ|उत्तर प्रदेश में सीबीएसई द्वारा आयोजित जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (जूनियर क्लर्क) भर्ती परीक्षा में हुई सेंधमारी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरोह ने अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र झांसी और ललितपुर सीएमओ दफ्तर से बनवाए थे। इसमें झांसी सिविल अस्पताल के एक कर्मचारी की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। इसके अलावा भी कई लोग रडार पर हैं। एसटीएफ सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। जल्द और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।एसटीएफ की टीम ने भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को दिव्यांग दिखाकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने वाले गिरोह का राजफाश किया था। इसमें बीसीए पास सरगना मनीष मिश्रा के दो साथी आकाश अग्रवाल व सौरभ सोनी के साथ तीन अभ्यर्थी राजकिशोर, राम मिलन, अभिषेक यादव व तीन सॉल्वर नीरज झां, सत्यम कुमार और दीपक कुमार समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। 

    40 फीसदी शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र बनवाया

    राजकिशोर का 40 फीसदी लो विजन दिव्यांगता प्रमाण पत्र ललितपुर सीएमओ दफ्तार से 19 अगस्त 2023 को बना था। अभ्यर्थी राम मिलन ने 40 फीसदी शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र सीएमओ झांसी के दफ्तर से बनवाया था।प्रमाण पत्र की आईडी UP ID NO – UP1590919950004 है। इसी तरह से अभ्यर्थी अभिषेक यादव ने लो विजन का प्रमाण पत्र बनवाकर परीक्षा में शामिल हुआ। आरोपी सत्यम ने 24 मार्च की सुबह पाली में नाबार्ड की चपरासी भर्ती परीक्षा में भी झांसी के निशांत सोनी की जगह शामिल हुआ था।
     
    40-40 हजार रुपये में बनवाए प्रमाण पत्र

    गिरोह पिछले सात-आठ वर्षों से ये फर्जीवाड़ा कर रहा है। इसमें मनीष मुख्य सरगना तो उसके साथी आकाश और सौरभ सोनी की भी बड़ी भूमिका है। आकाश का सीधा कनेक्शन झांसी सिविल अस्पताल के कर्मी मोंटी यादव उर्फ शिवा यादव है। उसकी मदद से वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाता था। इसलिए वह मोंटी को 40 हजार रुपये प्रति प्रमाण पत्र देता था। मोंटी की तरफ तीन से चार और संदिग्ध लोगों के नाम सामने आए हैं जिनका मुख्य कार्य दिव्यांग प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाना रहता था।

    चलने फिरने में असमर्थ….लेकिन दी दरोगा की परीक्षा

    एफआईआर एसटीएफ के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र राय ने दर्ज कराई है। एफआईआर के मुताबिक राम मिलन ने खुद को शारीरिक अक्षम दिखाकर परीक्षा में शामिल हुआ। जांच में सामने आया कि 14 मार्च को हुई दरोगा भर्ती परीक्षा भी उसने दी थी। इसलिए पुलिस अब इसकी रिपोर्ट पुलिस भर्ती बोर्ड को भी भेजेगी। दरोगा भर्ती परीक्षा में भी वह अयोग्य साबित किया जा जा सकता है।
     
    सरकारी कर्मचारी भी…फंसेगी नौकरी

    गिरफ्तार किए गए सॉल्वर नीरज झा बीटेक कंप्यूटर साइंस से पढ़ा हुआ है। वर्तमान में वह दिल्ली में पीडब्ल्यूडी विभाग में मल्टी टास्किंग टास्क के तहत कार्यरत है। वहीं आकाश अग्रवाल पीडब्ल्यूडी झांसी में बतौर क्लर्क काम कर रहा है। एसटीएफ मामले की रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजेगी। जिसके आधार पर इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    इनका करवा चुके हैं चयन

    गिरोह तमाम लोगों का चयन सॉल्कवर बैठाकर करवा चुके हैं। इसमें से कुछ नाम आरोपियों ने एसटीएफ को बताए। वर्ष 2023 में दिव्यांग श्रेणी में सुमित कुशवाहा नाम के शख्स का चयन बैंक में हुआ था। वर्तमान में उसकी तैनाती एसबीआई उरई में है। वर्ष 2025 मे बैंक क्लर्क के पद पर रुकमणि देवी को झांसी में परीक्षा देकर पास करवाया।इसके अलावा उरई की सृष्टि द्विवेदी का बैंक ऑफ बड़ौदा में पीओ के पद पर कराया। उनकी ट्रेनिंग लखनऊ में चल रही है। इसके अलावा मंजूलिका का केनरा बैंक में चयन कराया। अब इन सबकी नौकरी पर तलवार लटक गई है। ये चंद नाम हैं, आरोपियों ने सैकड़ों लोगों का चयन इस तरह कराया है।

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