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    परिवार का अनोखा विरोध: दो जगह धरना, कुडलवास और भिवानी में बढ़ी हलचल

    भिवानी। अपनी बेटी मनीषा की रहस्यमयी मौत के मामले में न्याय की गुहार लगा रहे एक बेबस पिता को सोमवार को उस समय भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जब पुलिस ने उन्हें आंदोलन करने से बीच रास्ते में ही रोक दिया। गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी संजय अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के मकसद से जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठने के लिए निकले थे। हालांकि, कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस बल ने उनके काफिले को गांव कुडलवास के पास ही रोक दिया, जिसके बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।

    बीच राह रोका तो सड़क पर ही जमा दिया डेरा

    पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद मृतका के पिता संजय पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर कुडलवास में ही सड़क किनारे अपना धरना शुरू कर दिया। इस बीच, भिवानी शहर में मौजूद मनीषा के दादा रामकिशन को जैसे ही इस कार्रवाई की भनक लगी, उन्होंने भी तुरंत शहर में मोर्चा संभालते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस वक्त स्थिति यह है कि एक ही मांग को लेकर दो अलग-अलग जगहों पर समानांतर धरने शुरू हो चुके हैं, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    नेशनल हाईवे ठप करने की दी खुली चेतावनी

    संजय ने पहले ही प्रशासन को सचेत कर दिया था कि अगर उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से भिवानी मुख्यालय नहीं जाने दिया गया, तो वे दिल्ली-पिलानी राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे) को पूरी तरह से जाम कर देंगे। उन्होंने साफ कहा कि इस मुख्य मार्ग पर लगने वाले लंबे जाम और जनता को होने वाली परेशानी की पूरी जवाबदेही सिर्फ और सिर्फ पुलिस प्रशासन की होगी। दरअसल, संजय ने पूर्व में ही जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था कि वह अपनी मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर भूख हड़ताल करेंगे, जिसके मद्देनजर कुडलवास में पहले से ही भारी तादाद में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।

    मौके पर भारी जमावड़ा, प्रशासनिक अधिकारी अलर्ट पर

    फिलहाल कुडलवास गांव के पास भारी संख्या में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के कारण भारी गहमागहमी बनी हुई है। मनीषा के पिता इस बात पर अड़े हैं कि वे अपनी बेटी के हत्यारों या दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर हाल में आमरण अनशन पर बैठेंगे, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दे रही है। स्थिति और ज्यादा संवेदनशील न हो या कोई हिंसक मोड़ न ले, इसके लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों ने जिला प्रशासन के आला अफसरों को मौके पर बुला लिया है और बातचीत के जरिए इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं।

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