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    कर्ज से मिलेगी मुक्ति, भौम प्रदोष पर व्रत करने से संकट होंगे दूर, जानें सही तिथि और धार्मिक महत्व

    हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना गया है. यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने से भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख, समृद्धि व सफलता के मार्ग खुलते हैं. पंचांग के अनुसार, हर महीने दो बार प्रदोष व्रत आता है, एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में, इस दिन श्रद्धालु सुबह से उपवास रखते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती सहित पूरे परिवार की विधि-विधान से पूजा करते हैं.

    अक्सर देखा जाता है. बहुत से लोग कहीं ना कहीं कर्ज से पीड़ित होते हैं और वो कर्ज (ऋण) को उतारने के लिए कई जतन करते है. साथ ही पूजा-पाठ करके देवी-देवताओं से कामना करता है कि उनका कर्ज जल्दी उतर जाए. आइए जानते हैं, उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से कि सितंबर के महीने में पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा. और इसको करने से कर्ज से कैसे मुक्ति मिल सकती है.
    कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत
    वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 3 बजे होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 8 सितंबर, दिन मंगलवार को रखा जाएगा. ये प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए ये भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा.

    भौम प्रदोष व्रत का महत्व
    मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों में इस दिन को कर्ज उतारने के लिए बड़ा ही श्रेष्ठ माना जाता है. पुराणों में बताया गया है कि त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति शिव प्रतिमा के दर्शन करता है उसके समस्त समस्याओं का हल निकलता है.
    जरूर करें इन नियमों का पालन
    -प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें.
    -इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें.
    -इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेलपत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें.
    -फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें उसके बाद पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.

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